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इंडो-पैसिफिक डायलॉग: 23 देशों के विशेषज्ञ समुद्री सुरक्षा को लेकर मंथन में जुटे

भारतीय नौसेना और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग-2025 का आयोजन नई दिल्ली में हो रहा है। यह भारतीय नौसेना का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है। यह मंच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सतत विकास को सशक्त करने की भारत की रणनीति को दर्शाता है।  

भारतीय नौसेना के मौजूदा व पूर्व वरिष्ठ अधिकारी भी इस चर्चा में शामिल हो रहे हैं

भारतीय नौसेना के मौजूदा व पूर्व वरिष्ठ अधिकारी भी इस चर्चा में शामिल हो रहे हैं। इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2025 में 23 देशों के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। यह डायलॉग भारतीय नौसेना की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और भारत के सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध इंडो-पैसिफिक विजन की दिशा में एक बड़ा कदम है। यहां संवाद से आगे बढ़कर साझा विकास और सुरक्षा के ठोस समाधान तैयार किए जा रहे हैं। 

इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग-2025 का उद्देश्य समकालीन और भविष्य की समुद्री चुनौतियों का समाधान खोजना है

इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग-2025 का उद्देश्य समकालीन और भविष्य की समुद्री चुनौतियों का समाधान खोजना है। क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और क्षमता संवर्धन को प्रोत्साहन देना है। यह आयोजन जलवायु सुरक्षा, ब्लू इकॉनमी, सप्लाई चेन व क्रिटिकल अंडरवाटर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों के नीति निर्माण पर भी फोकस करता है। साथ ही साथ यह विभिन्न सरकारी एजेंसियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। 

इस वर्ष डायलॉग का विषय ‘समग्र समुद्री सुरक्षा और विकास को बढ़ावा : क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और योग्यता संवर्द्धन’ है

इस वर्ष डायलॉग का विषय ‘समग्र समुद्री सुरक्षा और विकास को बढ़ावा : क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और योग्यता संवर्द्धन’ है। नौसेना के मुताबिक इस तीन दिवसीय संवाद में इंडो-पैसिफिक और अन्य देशों के रणनीतिक लीडर्स, नीति-निर्माता, राजनयिक और समुद्री विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। ये विशिष्ट व्यक्ति साझा समुद्री हितों और सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग अब अपने सातवें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। 

यह सम्मेलन महासागर नीति पर आधारित है, जो भारत की ‘साझा सुरक्षा और विकास’ के विजन को रेखांकित करता है

यह भारतीय नौसेना की अग्रणी अंतरराष्ट्रीय पहल है जो 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14वें ईस्ट एशिया समिट में प्रस्तुत इंडो-पैसिफिक ओशियन इनीशिएटिव की भावना पर आधारित है। इसका फोकस बात से आगे बढ़कर काम पर है, यानी केवल विचार नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजना और नीति-स्तर के समाधान तैयार करना। यह सम्मेलन महासागर नीति पर आधारित है, जो भारत की ‘साझा सुरक्षा और विकास’ के विजन को रेखांकित करता है। 

यहां पहले दिन 28 अक्टूबर को जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की जा रही है

भारत की इंडो-पैसिफिक विजन समावेशी है, जिसमें नौसेनाओं, कोस्ट गार्ड, नीति संस्थानों, अकादमिक जगत और उद्योग जगत सभी को भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है। यहां पहले दिन 28 अक्टूबर को जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा पर पड़ने वालेप्रभाव पर चर्चा की जा रही है। इसमें अफ्रीका, इंडोनेशिया और बांग्लादेश से विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। 

नौसेना के अनुसार इस वर्ष कुल 42 वक्ता भाग ले रहे हैं, जिनमें से 23 देशों के 30 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हैं

नौसेना के अनुसार इस वर्ष कुल 42 वक्ता भाग ले रहे हैं, जिनमें से 23 देशों के 30 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें प्रतिष्ठित राजदूत, वरिष्ठ राजनयिक, नीति-विश्लेषक और समुद्री रणनीति विशेषज्ञ शामिल होंगे। नौसेना का मानना है कि इस संवाद के निष्कर्ष आने वाले वर्षों के लिए क्षेत्रीय समुद्री एजेंडा तय करने में मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। यह भारत की भूमिका को और सुदृढ़ करेगा। (इनपुुट-आईएएनएस) 

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