लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और ऋणशोधन संहिता (IBC) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। इस विधेयक का उद्देश्य दिवालिया मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करना है।
इस संशोधन के तहत अब किसी कंपनी के डिफॉल्ट साबित होने पर 14 दिनों के भीतर दिवालिया आवेदन को स्वीकार करना अनिवार्य होगा। इससे मामलों में देरी कम होने की उम्मीद है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार ने IBC को मजबूत बनाने के लिए कुल 12 संशोधन प्रस्तावित किए हैं। उन्होंने कहा कि मामलों में देरी की मुख्य वजह लंबी कानूनी प्रक्रिया (लिटिगेशन) है।
नए प्रावधानों में प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि 2016 में लागू IBC कानून ने बैंकिंग सेक्टर की स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभाई है। इससे कंपनियों में वित्तीय अनुशासन बढ़ा है और उनकी क्रेडिट रेटिंग में भी सुधार हुआ है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि IBC का मकसद सिर्फ कर्ज वसूली नहीं है, बल्कि संकट में फंसी कंपनियों को बचाना और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारना है।
सरकार का मानना है कि इन नए बदलावों से दिवालिया मामलों का निपटारा तेजी से होगा और कारोबारी माहौल बेहतर बनेगा।
-(इनपुटःएजेंसी)


