प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने दिल्ली में एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली लागू करने को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर 1,789.52 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली में यातायात व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के जरिए अधिक सुचारु, सुरक्षित और प्रभावी बनाना है।
इस परियोजना के तहत दिल्ली के 42 प्रमुख यातायात गलियारों को तीन चरणों में शामिल किया जाएगा। पूरी परियोजना को 24 महीने में लागू करने का लक्ष्य है। इसके बाद पांच वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था की जाएगी।
दिल्ली में करीब 71 लाख सक्रिय पंजीकृत वाहन हैं। वाहनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जबकि सड़क ढांचे का विस्तार उसी गति से नहीं हुआ है। ऐसे में यातायात नियंत्रण के लिए तय समय वाली सिग्नल व्यवस्था और मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भरता बनी हुई है। नई व्यवस्था के जरिए सड़क पर मौजूद वास्तविक यातायात की स्थिति के अनुसार सिग्नल और यातायात प्रबंधन को बदला जा सकेगा।
यातायात सिग्नल खुद बदलेंगे: नई व्यवस्था में ऐसे सिग्नल लगाए जाएंगे जो सड़क पर वाहनों की संख्या और यातायात की स्थिति के अनुसार अपने समय में बदलाव कर सकेंगे। प्रमुख मार्गों पर लगे सिग्नलों के बीच भी बेहतर तालमेल बनाया जाएगा। इससे अनावश्यक रुकावट और जाम को कम करने में मदद मिलेगी।
एम्बुलेंस को मिलेगा रास्ता: आपातकालीन वाहनों, खासकर एम्बुलेंस के लिए प्राथमिकता वाला मार्ग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके जरिए भीड़भाड़ वाले इलाकों में एम्बुलेंस को तेजी से निकालने में मदद मिलेगी।
जाम और दुर्घटना की तुरंत जानकारी: सड़क पर जाम, धीमी गति से चल रहे यातायात और दुर्घटनाओं का वास्तविक समय में पता लगाया जा सकेगा। इससे दिल्ली पुलिस को यातायात को दूसरे मार्ग पर भेजने और दुर्घटना या जाम की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
यात्रियों को मिलेगी यातायात की जानकारी: सड़क किनारे लगाए जाने वाले सूचना पट्टों और डिजिटल माध्यमों के जरिए जाम, मार्ग परिवर्तन, पार्किंग की उपलब्धता और यातायात की स्थिति की जानकारी यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। यह जानकारी मार्ग बताने वाली सेवाओं को भी उपलब्ध कराई जा सकेगी।
नियम तोड़ने वालों पर तकनीक से नजर: नई व्यवस्था के तहत लाल बत्ती पार करने, निर्धारित रेखा से आगे वाहन रोकने, तेज गति से वाहन चलाने, गलत दिशा में वाहन चलाने, हेलमेट या सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने, अवैध पार्किंग और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने जैसी गतिविधियों की स्वचालित पहचान की जा सकेगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक की मदद से चोरी किए गए, संदिग्ध या प्रतिबंधित वाहनों की पहचान करने के साथ-साथ बार-बार यातायात नियम तोड़ने वाले वाहनों और दुर्घटना के बाद फरार होने वाले वाहनों की पहचान में भी मदद मिलेगी।
एक ही व्यवस्था से होगी पूरे शहर के यातायात की निगरानी
यातायात नियंत्रण, नियमों का पालन कराने और लोगों तक यातायात संबंधी जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था को यातायात नियंत्रण एवं कमान केंद्रों के माध्यम से एक साथ जोड़ा जाएगा। इसके लिए सुरक्षित आंकड़ा केंद्र और आपदा की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार की जाएगी।
परियोजना के तहत 1,092 यातायात सिग्नल स्थानों और 1,029 नियम-प्रवर्तन स्थानों को शामिल किया जाएगा। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। प्रत्येक चरण के प्रदर्शन, परीक्षण और निर्धारित मानकों पर खरा उतरने के बाद ही अगले चरण को आगे बढ़ाया जाएगा।
दिल्ली पुलिस प्रतिस्पर्धी निविदा के जरिए चुनी गई संस्था के माध्यम से परियोजना को लागू करेगी। सी-डैक (C-DAC) परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में तकनीकी सहायता देगा।
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था से दिल्ली की मौजूदा सड़कों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। इसका उद्देश्य यातायात को सुचारु करना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना, दुर्घटना और जाम की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करना तथा लोगों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक और अनुमानित बनाना है।


