अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने एशिया की आर्थिक वृद्धि दर के पूर्वानुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया है। 2025 के लिए विकास दर अब 4.5 प्रतिशत अनुमानित की गई है, जो अप्रैल के अनुमान से 0.6 प्रतिशत अंक अधिक है। हालांकि, आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जोखिम बने हुए हैं।
इस संबंध में आईएमएफ के एशिया-प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, “एशिया वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से सबसे अधिक जुड़ा क्षेत्र है। अमेरिका-चीन जैसे बड़े देशों के बीच तनाव बढ़ने पर इसका प्रभाव यहां कई गुना अधिक पड़ता है।”
रिपोर्ट आईएमएफ-विश्व बैंक की 2025 वार्षिक बैठक के दौरान जारी की गई।
बेहतर प्रदर्शन के पीछे के कारण
तकनीकी उछाल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से प्रेरित निर्यात में तेजी ने दक्षिण कोरिया और जापान को फायदा पहुंचाया।
वित्तीय सहारा: कमजोर अमेरिकी डॉलर, सस्ते ऋण और बढ़ते शेयर बाजारों ने अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती दी।
2024 से तुलना: पिछले साल की 4.6 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले 2025 में थोड़ी कमी, जबकि 2026 में यह 4.1 प्रतिशत तक धीमी होने का अनुमान है।
श्रीनिवासन ने बताया कि अप्रैल की तुलना में क्षेत्र उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन अमेरिकी टैरिफों का असर पहले से ही दिख रहा है।
अमेरिका-चीन विवाद का संभावित झटका
चीन द्वारा रेयर अर्थ निर्यात पर नियंत्रण कड़े करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 नवंबर से चीनी सामानों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। आईएमएफ ने कहा कि ये संभावित टैरिफ उसके नवीनतम अनुमान में शामिल नहीं हैं। यदि लागू हुए, तो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ेगा, ब्याज दरें ऊपर चढ़ सकती हैं और कर्ज बोझ बढ़ सकता है।”
श्रीनिवासन ने आगाह किया कि व्यापार नीति की अनिश्चितता या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर विकास दर प्रभावित होगी। एशिया वैश्विक विकास में 60 प्रतिशत योगदान देगा, लेकिन बाहरी झटके इसे कमजोर कर सकते हैं।
सुझाव: घरेलू मांग और एकीकरण पर जोर
आईएमएफ ने एशियाई देशों को निर्यात निर्भरता कम कर घरेलू मांग बढ़ाने की सलाह दी। क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण से मध्यम अवधि में जीडीपी में 1.4 प्रतिशत अतिरिक्त वृद्धि संभव है। सुधारों से एशिया वैश्विक विकास का प्रमुख योगदानकर्ता बना रहेगा। यह रिपोर्ट क्षेत्र की लोचशीलता को रेखांकित करती है, लेकिन जोखिमों की अनदेखी न करने की चेतावनी देती है। यदि तनाव कम हुए, तो वृद्धि और मजबूत हो सकती है। (इनपुट-एजेंसी)


