केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को कहा कि सरकार ने ई85 (E85) ईंधन को ई85-संगत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए शुरू कर दिया है और एथेनॉल आधारित ईंधनों के भविष्य के विस्तार को लेकर वाहन उद्योग के साथ व्यापक चर्चा की जा रही है।
पुरी ने एथेनॉल मिश्रण के क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि देश ने अपने निर्धारित लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का स्तर 1.5 प्रतिशत था, जो नवंबर 2022 में बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया। वहीं 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य, जिसे वर्ष 2030 तक हासिल किया जाना था, भारत ने वर्ष 2024 में ही पूरा कर लिया।
पुरी ने कहा, “2014 से अब तक हमने एथेनॉल मिश्रण को 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया, जो नवंबर 2022 में हासिल हुआ। हमारा लक्ष्य 2030 तक 20 प्रतिशत मिश्रण का था, लेकिन हमने इसे 2024 में ही पूरा कर लिया।”
उन्होंने कहा, “वर्तमान में हम उद्योग जगत, वाहन निर्माता संघ सियाम (SIAM) और अन्य संगठनों के साथ व्यापक चर्चा कर रहे हैं। इस बीच हमने E85 ईंधन भी शुरू कर दिया है। हालांकि E85 केवल उन वाहनों के लिए उपलब्ध है जो E85-संगत फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर आधारित हैं।”
देश की व्यापक ऊर्जा रणनीति पर बोलते हुए पुरी ने कहा कि भारत घरेलू खोज और उत्पादन गतिविधियों में वृद्धि, जैव ईंधन मिश्रण के विस्तार तथा नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाकर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत नए कुओं की ड्रिलिंग और घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए 90,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
हाल में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर उठे सवालों पर मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कई बार उत्पाद शुल्क में कटौती किए जाने के कारण दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें आज भी चार वर्ष पहले की तुलना में कम हैं।
उन्होंने बताया कि नवंबर 2021, मई 2022 और उसके बाद केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी की, जबकि कई भाजपा शासित राज्यों ने भी ईंधन पर मूल्य वर्धित कर (वैट) घटाया।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार किए जाने के संबंध में पुरी ने कहा कि यह फैसला सब्सिडी के दुरुपयोग की रिपोर्टों के आधार पर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि कुछ लाभार्थियों द्वारा रियायती एलपीजी सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग किए जाने या उन्हें दोबारा बेचने की शिकायतें मिली थीं, जबकि उन्हें पूरे कोटे की आवश्यकता भी नहीं थी।
-(इनपुटःएजेंसी)


