ईरान का कूटनीतिक संदेश: अमेरिकी जनता के प्रति दोस्ती, नीतियों से है मतभेद

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरानी जनता अमेरिकी लोगों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखती है। वहीं, उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर ईरान के खिलाफ “इज़रायल के प्रतिनिधि (प्रॉक्सी)” के रूप में लड़ने का आरोप लगाया। शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने ये टिप्पणियां अमेरिकी जनता को संबोधित एक पत्र में कीं, जिसमें उन्होंने अमेरिका और इज़रायल के साथ चल रहे युद्ध को लेकर ईरान के रुख को विस्तार से बताया।

पेज़ेशकियन ने कहा, “ईरानी लोग अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों सहित किसी भी अन्य राष्ट्र के प्रति दुश्मनी नहीं रखते।” उन्होंने कहा, “अपने गौरवशाली इतिहास के दौरान बार-बार विदेशी हस्तक्षेप और दबावों का सामना करने के बावजूद, ईरानियों ने हमेशा सरकारों और उनके लोगों के बीच स्पष्ट अंतर किया है।” पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरान ने “अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी आक्रामकता, विस्तारवाद, उपनिवेशवाद या प्रभुत्व का रास्ता नहीं चुना,” जबकि उसे वैश्विक शक्तियों द्वारा कब्जे, आक्रमण और दबाव का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि ईरान को खतरे के रूप में प्रस्तुत करना इज़रायल द्वारा गढ़ी गई कहानी है, जिसका उद्देश्य “फिलिस्तीनियों के खिलाफ अपने अपराधों से वैश्विक ध्यान हटाना” है। पेज़ेशकियन ने ईरान के आसपास अमेरिकी सैन्य जमावड़े और ठिकानों का जिक्र करते हुए कहा कि इन ठिकानों से शुरू हुई अमेरिकी “आक्रामकताएं” यह दिखाती हैं कि ऐसी सैन्य मौजूदगी कितनी खतरनाक हो सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आने वाले दिनों में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले की धमकी के जवाब में उन्होंने कहा कि देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला सीधे ईरानी जनता को निशाना बनाता है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे कदम “युद्ध अपराध” हैं और इनके प्रभाव ईरान की सीमाओं से बाहर तक जाएंगे।

पेज़ेशकियन ने कहा कि अमेरिका इज़रायल के “प्रॉक्सी” के रूप में और उसके प्रभाव में आकर ईरान के साथ युद्ध में शामिल हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इज़रायल अपने “अवैध हितों” के लिए “आखिरी अमेरिकी सैनिक और आखिरी अमेरिकी करदाता के पैसे तक” ईरान से लड़ना चाहता है। उन्होंने सवाल किया, “क्या ‘अमेरिका फर्स्ट’ वास्तव में आज अमेरिकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है?” उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय “एक चौराहे पर खड़ी है,” जहां उसे टकराव और संवाद के बीच चयन करना होगा।

28 फरवरी को, इज़रायल और अमेरिका ने तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों व संपत्तियों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू की।(इनपुट-आईएएनएस)

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