जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने ‘वॉटर-पॉजिटिव’ का दर्जा हासिल कर लिया है, जिससे यह राजस्थान का पहला और देश के कुछ चुनिंदा एयरपोर्ट्स में से एक बन गया है, जिसने यह उपलब्धि हासिल की है। यह प्रमाणन वैश्विक कंसल्टिंग कंपनी ब्यूरो वेरिटास ने एयरपोर्ट की जल प्रबंधन और पर्यावरणीय व्यवस्था का आकलन करने के बाद दिया है।
यह जितना पानी इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा पानी बचाता है
‘वॉटर-पॉजिटिव’ एयरपोर्ट का मतलब है कि यह जितना पानी इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा पानी बचाता और दोबारा उपयोग करता है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान इस एयरपोर्ट ने 1,03,387 किलो लीटर पानी इस्तेमाल किया, जबकि 1,37,085 किलो लीटर पानी को रीसाइक्लिंग और रिचार्ज के जरिए वापस जोड़ा।
पानी की कमी वाले क्षेत्र में होने के कारण एयरपोर्ट ने पानी बचाने के लिए कई कदम उठाए
पानी की कमी वाले क्षेत्र में होने के कारण एयरपोर्ट ने पानी बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें 18 गहरे रिचार्ज पिट लगाए गए हैं, जिससे बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाया जा सके। जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रवक्ता के अनुसार, “यह उपलब्धि हवाई अड्डे द्वारा वॉटर-पॉजिटिविटी की दिशा में किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
इस उपलब्धि के पीछे तीन मुख्य कारण
इस उपलब्धि के पीछे तीन मुख्य कारण हैं — 100 प्रतिशत पानी का रीसाइक्लिंग और दोबारा उपयोग, ताजे पानी की खपत में कमी, और मजबूत वर्षा जल संचयन व्यवस्था।”
राजस्थान का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा वित्त वर्ष 2025 में 60 लाख से ज्यादा यात्रियों को संभाल चुका है और रोजाना करीब 120 फ्लाइट मूवमेंट संभालता है।
776 एकड़ में फैला यह एयरपोर्ट ‘डिजिटल-फर्स्ट’ तरीके से काम करता
776 एकड़ में फैला यह एयरपोर्ट ‘डिजिटल-फर्स्ट’ तरीके से काम करता है। इस एयरपोर्ट को पहले ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल (जेडडब्ल्यूएल)’ सर्टिफिकेट भी मिल चुका है, जो सीआईआई-आईटीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा दिया गया है। साथ ही मई 2025 में एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल द्वारा एसीआई लेवल-3 मान्यता भी प्रदान की गई थी। (इनपुट-एजेंसी)


