जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने आज शुक्रवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में छठे नदी उत्सव का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन भाषण में पाटिल ने समुदायों को बनाए रखने और देश के सांस्कृतिक लोकाचार को आकार देने में नदियों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए नदियों के संरक्षण में सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि भारत नदियों का देश है। विश्व की सबसे सुंदर नदी, गंगा, भारत में बहती है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी नदियों को प्रदूषित न करें। पाटिल ने आगे कहा कि नदी संरक्षण की दिशा में तीन स्तरों-अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, वाटर विज़न@2047 के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। पाटिल ने नदियों के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नदियां केवल संसाधन नहीं हैं, बल्कि हमारी भावनाओं और संस्कृति की धारा हैं।
उन्होंने आगाह किया कि मानवीय हस्तक्षेप ने नदियों को भारी नुकसान पहुंचाया है और उनका संरक्षण एक साझा ज़िम्मेदारी है। उन्होंने नदी उत्सव के निरंतर आयोजन के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की भी सराहना की।
उद्घाटन सत्र में इस्कॉन के आध्यात्मिक गुरु गौरांग दास, साध्वी विशुद्धानंद भारती ठाकुर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी भी उपस्थित थे।


