5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने के बाद क्षेत्र की राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक दिशा में बड़े बदलाव हुए। करीब सात साल बाद सरकारी आंकड़ों और विभिन्न विकास संकेतकों पर नजर डालें तो अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे, सरकारी निवेश और पर्यटन समेत कई क्षेत्रों में बदलाव दिखाई देता है। हालांकि, इन आंकड़ों को व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है, क्योंकि विकास का आकलन केवल सरकारी खर्च या सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में वृद्धि के आधार पर नहीं किया जा सकता।
आर्थिक विकास ने पकड़ी रफ्तार
2024-25 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर का GSDP वर्ष 2020-21 के 1.68 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2.62 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय 1.01 लाख रुपए से बढ़कर 1.55 लाख रुपए पहुंच गई। ये आंकड़े क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और आय के अवसरों में वृद्धि की ओर संकेत करते हैं।
विकास पर बढ़ा सरकारी निवेश
सरकार ने विकास से जुड़े क्षेत्रों में खर्च बढ़ाया है। आर्थिक सेवाओं पर खर्च 14,842 करोड़ रुपए से बढ़कर 23,257 करोड़ रुपए, जबकि सामाजिक सेवाओं पर खर्च 21,964 करोड़ रुपए से बढ़कर 28,234 करोड़ रुपए हो गया। 2024-25 में कुल सरकारी खर्च का करीब 62% हिस्सा सामाजिक और आर्थिक सेवाओं पर किया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को इसमें प्राथमिकता मिली।
सरकारी खर्च और GSDP के अनुपात में बदलाव
CAG के आंकड़ों के मुताबिक, कुल सरकारी खर्च और GSDP का अनुपात 37.66% से घटकर 31.45% रह गया। यह बताता है कि GSDP की तुलना में सरकारी खर्च का अनुपात कम हुआ है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर सरकारी निर्भरता में कमी का निर्णायक प्रमाण मानने के बजाय अर्थव्यवस्था और राजकोषीय संरचना में आए बदलाव के संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा।
बुनियादी ढांचे में तेज बदलाव
सड़क, रेल और सुरंग परियोजनाओं ने जम्मू-कश्मीर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय राजमार्गों, आधुनिक सुरंगों और रेलवे नेटवर्क के विस्तार से दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच आसान हुई है। घाटी को देश के अन्य हिस्सों से रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
पर्यटन बना आर्थिक गतिविधियों का बड़ा आधार
जम्मू-कश्मीर में पर्यटन क्षेत्र ने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण गति हासिल की है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या का असर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, रेस्तरां और स्थानीय कारोबार पर पड़ा है। पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबार और स्वरोजगार के अवसरों ने स्थानीय युवाओं के लिए आय के नए रास्ते भी खोले हैं।
निवेश और रोजगार पर जोर
औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए नई नीतियों और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही स्टार्टअप, स्वरोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़ी योजनाओं के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इन पहलों की वास्तविक सफलता का आकलन निवेश प्रस्तावों के बजाय जमीन पर हुए वास्तविक निवेश और पैदा हुए स्थायी रोजगार के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
PoJK में आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को लेकर समय-समय पर रिपोर्टें सामने आती रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों और रिपोर्टों में बेरोजगारी, महंगाई, बिजली की कीमतों और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता जैसे मुद्दों को प्रमुख चिंता के रूप में रेखांकित किया गया है। सब्सिडी वाले गेहूं, बिजली और बेहतर प्रशासन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। हालांकि, PoJK और भारतीय जम्मू-कश्मीर के आंकड़ों की सीधी तुलना करते समय स्रोत, वर्ष, परिभाषा और आंकड़ा-संग्रह की पद्धति में अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
तुलना से क्या तस्वीर उभरती है?
दोनों क्षेत्रों की विकास यात्रा की तुलना करने पर बुनियादी ढांचे, सरकारी निवेश, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े अलग-अलग रुझान दिखाई देते हैं। भारतीय जम्मू-कश्मीर में सड़क, रेल, पर्यटन और विकास परियोजनाओं में निवेश बढ़ा है, जबकि PoJK में आर्थिक दबाव और सार्वजनिक असंतोष से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं।
सात साल बाद बदलाव का आकलन
अनुच्छेद 370 में बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर में GSDP और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, विकास परियोजनाओं पर खर्च, कनेक्टिविटी में सुधार और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण संकेतक सामने आए हैं। हालांकि, इन उपलब्धियों के साथ रोजगार, निजी निवेश, औद्योगिकीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय असमानता जैसी चुनौतियों पर निरंतर काम करना भी जरूरी है।
टिकाऊ विकास के लिए आगे की चुनौती
आने वाले वर्षों में यदि बुनियादी ढांचे के साथ गुणवत्तापूर्ण रोजगार, निजी निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन पर समान जोर बना रहता है, तो जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में अधिक व्यापक और टिकाऊ बदलाव की संभावना मजबूत हो सकती है। सात वर्षों के बदलाव का वास्तविक आकलन इसी आधार पर होगा कि विकास के ये लाभ कितने व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचते हैं और कितने स्थायी रोजगार एवं आर्थिक अवसर पैदा होते हैं।


