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BRICS शिखर सम्मेलन में संयुक्त घोषणा की उम्मीद, रूस ने भारत की कूटनीति पर जताया भरोसा

रूस ने मंगलवार को उम्मीद जताई कि BRICS के सदस्य देश नई दिल्ली में होने वाले आगामी शिखर सम्मेलन में एक संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाने में सफल होंगे। रूस को भरोसा है कि पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेदों के बावजूद घोषणा पर आम सहमति बन जाएगी।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भारतीय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शिखर सम्मेलन में राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था एवं वित्त तथा नई तकनीकों के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि BRICS एक निष्पक्ष और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की तस्वीर पेश करता है।

राष्ट्रीय मुद्राओं में बढ़ा कारोबार

पेस्कोव ने बताया कि रूस अब BRICS साझेदार देशों, जिसमें भारत भी शामिल है, के साथ अपने 90 प्रतिशत वित्तीय लेनदेन राष्ट्रीय मुद्राओं में करता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि BRICS अमेरिकी डॉलर को चुनौती देने के लिए कोई स्पष्ट ‘डी-डॉलराइजेशन’ नीति नहीं अपना रहा है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मुद्राओं का इस्तेमाल डी-डॉलराइजेशन नीति नहीं है, बल्कि यह देशों के राष्ट्रीय हितों के अनुसार बेहतर विकल्प अपनाने का तरीका है। पेस्कोव के मुताबिक, BRICS देशों में यह बदलाव मुख्य रूप से पश्चिमी दबाव के कारण हुआ है और इसका उद्देश्य डॉलर को जानबूझकर छोड़ना नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी देश को दूसरे देशों की मुद्रा के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलती, तो वह अपनी राष्ट्रीय मुद्रा का इस्तेमाल करता है।

ईरान-UAE मतभेदों के बीच घोषणा पर नजर

भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में करेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई प्रमुख नेता सम्मेलन में शामिल होंगे।

पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और UAE के बीच गंभीर मतभेदों के कारण भारत के सामने संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाने की चुनौती है। BRICS में फैसले आम सहमति के आधार पर होते हैं, इसलिए सम्मेलन के अंत में संयुक्त घोषणा जारी होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पेस्कोव ने ईरान और UAE के रुख में मतभेदों को स्वीकार करते हुए कहा कि रूस चाहता है कि उसके मित्र देश इस मुश्किल दौर से बाहर निकलें। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर रूस ईरान और UAE के संबंध सामान्य करने की दिशा में योगदान देने के लिए तैयार है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि घोषणा पर चल रही बातचीत का सकारात्मक नतीजा निकलेगा। पेस्कोव ने भारत के राजनयिकों की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए जरूरी शब्दों पर सहमति बन जाएगी।

उन्होंने कहा कि रूस क्षेत्र में सुरक्षा और आपसी विश्वास के पक्ष में है।

मई में BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक भी ईरान और UAE के बीच पश्चिम एशिया संकट को लेकर मतभेदों के कारण संयुक्त बयान जारी किए बिना समाप्त हो गई थी। उस समय भारत ने अध्यक्ष के तौर पर एक बयान और परिणाम दस्तावेज जारी किया था, जिसमें दो ऐसे पैराग्राफ थे जिन पर सभी देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी थी।

पेस्कोव ने कहा कि रूस और भारत इस बात पर एकमत हैं कि BRICS को पश्चिम विरोधी समूह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समूह किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है।

उन्होंने भारत की BRICS अध्यक्षता की सराहना करते हुए आगामी शिखर सम्मेलन के सफल रहने का भरोसा जताया।

BRICS में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और सऊदी अरब इसके सदस्य बने, जबकि इंडोनेशिया 2025 में शामिल हुआ। बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल BRICS के पार्टनर देश बने।

BRICS में अब 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत GDP और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करती हैं।

-(इनपुटः PTI)