जेएसएससी-सीजीएल रद्द: आंदोलनकारी छात्रों ने मनाई जीत, नियुक्त अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद सोमवार को रांची में एक ही परीक्षा को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 24 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों ने फैसले का जश्न मनाया, वहीं परीक्षा के जरिए चयनित होकर विभिन्न सरकारी पदों पर कार्यरत 2 हजार से अधिक अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुट गए और सरकार के निर्णय का विरोध किया।

24 दिन के आंदोलन के बाद छात्रों ने मनाई जीत

सरकार के फैसले की जानकारी मिलते ही जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। छात्रों ने एक-दूसरे को बधाई दी, मिठाई खिलाई और जमकर नारेबाजी की। कई अभ्यर्थी खुशी से झूमते नजर आए। लंबे समय से धरना और अनशन कर रहे छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी जीत बताया।

बारिश और प्रतिकूल परिस्थितियों में जारी रखा आंदोलन

आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर वे लगातार आंदोलन कर रहे थे। बारिश, गर्मी और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आंदोलन जारी रखा गया। छात्र नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल परीक्षा रद्द कराना नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है, जिसमें योग्य अभ्यर्थियों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।

गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

छात्रों ने सरकार से भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच पूरी कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक के बाद की घोषणा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि एसआईटी और सीआईडी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं और विभिन्न एजेंसियों के बीच घालमेल के संकेत मिले हैं। सरकार ने 2014 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच कराने का भी फैसला किया है।

परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए समिति गठित

सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्णय लिया है। समिति परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधारों को लेकर सुझाव देगी। सरकार ने आम लोगों से भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार के संबंध में सुझाव मांगे हैं।

2 हजार से ज्यादा चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी पर सवाल

जेएसएससी-सीजीएल के जरिए 2 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का विभिन्न सरकारी पदों पर चयन हुआ है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनमें से कई अभ्यर्थी करीब एक साल से अलग-अलग विभागों में कार्यरत हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद इन नियुक्तियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रोजेक्ट भवन के बाहर चयनित अभ्यर्थियों का विरोध

परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थी झारखंड मंत्रालय स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने रोजगार और भविष्य को लेकर चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, परिणाम के बाद नियुक्ति पत्र प्राप्त किया और संबंधित पदों पर योगदान भी दे दिया। ऐसे में अब परीक्षा रद्द किए जाने से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

दोषियों की सजा हो, नौकरी करने वालों को न भुगतना पड़े खामियाजा

चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और उनके लिए वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग की। उनका कहना था कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उन अभ्यर्थियों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी नौकरी हासिल की है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ 24 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांग पूरी होने के बाद भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जांच को आगे बढ़ाना है, तो दूसरी तरफ परीक्षा के जरिए नियुक्त हुए 2 हजार से अधिक अभ्यर्थियों की नौकरी और भविष्य को लेकर समाधान तलाशना है। फिलहाल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनकारी छात्रों के बीच जश्न का माहौल है, जबकि प्रोजेक्ट भवन के बाहर चयनित अभ्यर्थी अपने रोजगार की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। (इनपुट: आईएएनएस)