पीओके में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ बेल्जियम में कश्मीरी समुदाय ने निकाला मार्च

बेल्जियम में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों की निंदा की। कश्मीरी समुदाय ने राजधानी ब्रसेल्स में यूरोपियन पार्लियामेंट से यूनाइटेड नेशंस के ऑफिस तक एक विरोध मार्च निकाला।

प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए गए और पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की मांग की। इन उल्लंघनों में जरूरी सेवाओं पर रोक और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल का क्रूर इस्तेमाल शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने पीओके में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से की गई क्रूर कार्रवाई के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की।

इस हफ्ते की शुरुआत में पीओके स्थित मानवाधिकार दस्तावेजीकरण और निगरानी संस्था जम्मू-कश्मीर मानवाधिकार वेधशाला (जेकेएचआरओ) ने 5 जून से 5 अगस्त के बीच कब्जे वाले इलाके में बढ़ती अशांति के दौरान 93 नागरिकों की मौत दर्ज की।

पिछले हफ्ते हजारों कश्मीरी प्रवासियों ने इटली के बोलोग्ना शहर में विरोध मार्च निकाला और पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की क्रूरता की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने नागरिक समाज समूह ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) के साथ एकजुटता व्यक्त की और क्षेत्र में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अभियानों को समाप्त करने की मांग की।

जेएएसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इटली में कश्मीरियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे पाकिस्तानी सेना द्वारा निहत्थे नागरिकों के ‘नरसंहार’ के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा, “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी केवल अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं।”

हाल ही में, कई ब्रिटिश सांसदों ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पीओके में नागरिकों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की क्रूरता पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद लियाम बायरन ने कहा था कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोलीबारी की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। पीओके में नागरिकों की हत्या को ‘त्रासदी’ बताते हुए एक अन्य ब्रिटिश सांसद अदनान हुसैन ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अत्यधिक या गैर-कानूनी बल के किसी भी इस्तेमाल की पूरी, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।(इनपुट-आईएएनएस)

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