लोकसभा अध्यक्ष से मिले केन्याई स्पीकर, भारत की UNSC स्थायी सदस्यता का समर्थन दोहराया

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि भारत और केन्या के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और बहुआयामी संबंध हैं। उन्होंने कहा कि नियमित उच्चस्तरीय संवाद और संपर्क ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को लगातार मजबूत किया है। बिरला ने यह बात संसद भवन परिसर में केन्या की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष मूसा एम. वेटांग’उला के नेतृत्व वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कही। बैठक में केन्या ने 21वीं सदी की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी किया।

सीएसपीओसी बैठक का किया स्मरण

बिरला ने इस वर्ष की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित 28वें सीएसपीओसी के दौरान वेटांग’उला के साथ हुई अपनी मुलाकात को याद किया। उन्होंने कहा कि वेटांग’उला को सार्वजनिक जीवन का व्यापक अनुभव है और विधि, विधिनिर्माण तथा प्रशासन के क्षेत्र में उनका विशिष्ट अनुभव रहा है। बिरला ने केन्या की जनता के हित में सुशासन को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की।

भारतीय मूल के लोगों की मान्यता का स्वागत

भारत और केन्या के बीच सदियों पुराने जन-जन के संबंधों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने भारतीय मूल के लोगों को स्वदेशी समुदाय के रूप में मान्यता देने के केन्या सरकार के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच संबंध और अधिक प्रगाढ़ हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत और केन्या लोकतंत्र, समावेशी विकास और मानव-केंद्रित प्रगति को विशेष महत्व देते हैं। दोनों देशों का यह साझा दृष्टिकोण द्विपक्षीय संबंधों को विशेष गहराई प्रदान करता है।

केन्या के स्वतंत्रता संघर्ष में गांधी के प्रभाव का उल्लेख

बिरला ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ केन्या के स्वतंत्रता संघर्ष पर महात्मा गांधी के प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को दुनिया भर में सत्य और अहिंसा के शांतिपूर्ण संघर्ष के शाश्वत प्रतीक के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने केन्या की संसद में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित करने पर सहमति देने के लिए वेटांग’उला का आभार जताया।

भारतीय लोकतंत्र में व्यापक जनभागीदारी

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद संविधान के मार्गदर्शन में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत ने व्यापक विकास और सामाजिक परिवर्तन देखा है। उन्होंने भारत की निर्वाचन प्रक्रिया में जनता की व्यापक भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में करीब 97 करोड़ पात्र मतदाताओं में से लगभग 65 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास और आस्था का प्रमाण बताया।

संसदीय संवाद को और मजबूत करने पर जोर

बिरला ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां नागरिकों की आशाओं और आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत और केन्या के बीच संसदीय संवाद लगातार मजबूत हो रहा है। दोनों देशों में संसदीय मैत्री समूहों के गठन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान से द्विपक्षीय संसदीय संबंधों को नए आयाम दिए जा सकते हैं।

केन्याई सांसदों के प्रशिक्षण में सहयोग

लोकसभा अध्यक्ष ने केन्या की संसद की आवश्यकताओं के अनुरूप वहां के सांसदों और अधिकारियों के लिए संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान फॉर डेमोक्रेसीज (PRIDE) की ओर से आयोजित किए जा रहे नियमित कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में संसद के कामकाज में प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल अब अपरिहार्य हो गया है।

संसद में AI के इस्तेमाल का अनुभव साझा करेगा भारत

बिरला ने बताया कि भारतीय संसद ने पारदर्शिता, दक्षता, समावेशिता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अपने कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में अपने अनुभव और विशेषज्ञता को केन्या की संसद के साथ साझा करने के लिए तैयार है। इससे दोनों देशों की संसदों के बीच तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।

वेटांग’उला ने भारत के स्वागत के लिए जताया आभार

केन्या की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष मूसा एम. वेटांग’उला ने गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए बिरला का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित 28वें सीएसपीओसी को याद करते हुए कहा कि यह सबसे सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित संसदीय कार्यक्रमों में से एक था।

केन्या के विकास में भारतीय समुदाय का योगदान

वेटांग’उला ने कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने केन्या के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय संसद और सरकार सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने दोनों देशों के बीच संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक बहुपक्षीय मंचों पर मजबूत संबंधों का भी उल्लेख किया।

भारत की UNSC स्थायी सदस्यता का समर्थन

वेटांग’उला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लोकतांत्रिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाया जाना चाहिए। इस तरह केन्या ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को अपना समर्थन दोहराया। (इनपुट: पीआईबी)