राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-6 की फैक्ट शीट्स का जारी होना भारत के स्वास्थ्य एवं सांख्यिकीय तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। स्वास्थ्य, पोषण और जनसंख्या संबंधी प्रमुख संकेतकों में हुई प्रगति को रेखांकित करने वाली ये फैक्ट शीट्स सरकार के राष्ट्रीय डेटा प्रणालियों के समन्वय (डेटा हार्मोनाइजेशन) के प्रयासों को भी नई गति देती हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, एनएफएचएस-6 फैक्ट शीट्स में 101 प्रमुख संकेतकों को शामिल किया गया है, जो देश के स्वास्थ्य और जनसांख्यिकीय परिदृश्य की एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल सूचना प्रसार का पहला चरण है और इसे एनएफएचएस-6 की अंतिम राष्ट्रीय रिपोर्ट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विस्तृत राष्ट्रीय रिपोर्ट बाद में जारी की जाएगी, जिसमें अधिक संकेतक, गहन विश्लेषण और कार्यप्रणाली संबंधी विवरण शामिल होंगे।
प्रमुख निष्कर्षों पर केंद्रित है फैक्ट शीट्स का प्रारूप
मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट शीट्स का उद्देश्य नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों की त्वरित जानकारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि कुछ संकेतकों की अनुपस्थिति को लेकर उठाए गए सवालों को व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है, क्योंकि भारत में अब कई विशेषीकृत सर्वेक्षण और प्रशासनिक डेटा प्रणालियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक संकेतक को उसके लिए सबसे उपयुक्त और प्रामाणिक स्रोत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए। इससे डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी, दोहराव कम होगा और राष्ट्रीय स्तर पर डेटा समरूपता को बढ़ावा मिलेगा।”
विभिन्न डेटा स्रोतों के बेहतर समन्वय पर जोर
अधिकारियों के अनुसार, स्वच्छता और स्वच्छ ईंधन उपयोग जैसे संकेतकों की निगरानी पहले से ही विशेष प्लेटफॉर्मों और सर्वेक्षणों के माध्यम से की जा रही है। इनमें स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के सर्वेक्षण शामिल हैं। ऐसे में इन आंकड़ों को दोबारा फैक्ट शीट्स में शामिल करना आवश्यक नहीं समझा गया।
इसी प्रकार मृत्यु दर, जन्म पंजीकरण और जनसंख्या संबंधी प्रमुख आंकड़ों के लिए सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस), सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) और जनगणना तंत्र को आधिकारिक स्रोत माना जाता है। मंत्रालय का कहना है कि विभिन्न संस्थागत डेटा स्रोतों का बेहतर उपयोग भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बना रहा है।
एनीमिया के आकलन में अपनाया गया नया दृष्टिकोण
एनएफएचएस-6 में एनीमिया संबंधी आंकड़ों को शामिल न किए जाने पर भी अधिकारियों ने स्पष्टीकरण दिया है। उनके अनुसार, सर्वेक्षण के इस चरण में हीमोग्लोबिन परीक्षण नहीं किया गया क्योंकि पूर्व के सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई कोशिका रक्त (कैपिलरी ब्लड) सैंपलिंग पद्धति की सटीकता को लेकर कुछ वैज्ञानिक चिंताएं सामने आई थीं।
अधिकारियों ने बताया कि एनीमिया की व्यापकता का आकलन अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के ‘डाइट एंड बायोमार्कर्स सर्वे’ के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें अधिक सटीक मानी जाने वाली शिरापरक रक्त (वीनस ब्लड) सैंपलिंग पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।
नए संकेतकों को भी मिला स्थान
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, एनएफएचएस-6 ने अपने दायरे को सीमित करने के बजाय कई नए संकेतकों को शामिल किया है। इनमें जनसंख्या संरचना, बुजुर्ग आबादी की हिस्सेदारी, वित्तीय समावेशन, प्रसवपूर्व देखभाल सेवाओं का उपयोग, टीकाकरण कवरेज, गंभीर डायरिया की व्यापकता तथा स्तनपान से जुड़े विस्तारित संकेतक शामिल हैं।अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार नियोजन, महिलाओं के स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य हस्तक्षेपों और एचआईवी संबंधी कई विस्तृत संकेतकों को हटाया नहीं गया है। इन्हें आगामी राष्ट्रीय रिपोर्ट में व्यापक विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।
साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की आधारशिला बना हुआ है एनएफएचएस
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि एनएफएचएस देश का सबसे बड़ा और व्यापक घरेलू स्वास्थ्य सर्वेक्षण बना हुआ है तथा स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में इसकी केंद्रीय भूमिका बनी हुई है। अंतिम राष्ट्रीय रिपोर्ट तकनीकी विशेषज्ञों, संबंधित मंत्रालयों और विकास भागीदारों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद तैयार की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बदलती नीतिगत आवश्यकताओं और उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एनएफएचएस प्रश्नावली में समय-समय पर संशोधन किए जाते हैं। यह प्रक्रिया विश्व के प्रमुख घरेलू सर्वेक्षणों में अपनाई जाने वाली स्थापित अंतरराष्ट्रीय प्रथा के अनुरूप है।
अधिक परिपक्व हो रही है भारत की सांख्यिकीय प्रणाली
मंत्रालय का मानना है कि एनएफएचएस-6 की रिपोर्टिंग संरचना भारत की विकसित होती सांख्यिकीय प्रणाली का संकेत है, जहां विभिन्न विशेषीकृत सर्वेक्षण और प्रशासनिक डेटाबेस एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम कर रहे हैं। इससे देश के विकास की अधिक व्यापक, सटीक और नीति-उन्मुख तस्वीर सामने आने में मदद मिल रही है।
अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट शीट्स केवल पहला चरण हैं और आगामी विस्तृत राष्ट्रीय रिपोर्ट भारत की स्वास्थ्य स्थिति, पोषण संबंधी प्रगति और जनसांख्यिकीय बदलावों की कहीं अधिक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करेगी। उनका कहना है कि एनएफएचएस-6 का मूल उद्देश्य अपरिवर्तित है-बेहतर स्वास्थ्य परिणामों और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़े उपलब्ध कराना।


