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कोंकणी भाषा को मिलेगा तकनीक का साथ, BHASHINI और गोवा सरकार की संयुक्त पहल

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन और गोवा सरकार ने राज्य में बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भाषा-आधारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) को बढ़ावा देने के लिए पणजी में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स और भाषा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से डिजिटल शासन को अधिक समावेशी और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाना था।

इस कार्यशाला का विशेष फोकस कोंकणी भाषा पर रहा। इसमें बताया गया कि AI आधारित भाषा तकनीक की मदद से नागरिक अपनी पसंदीदा भाषा में सरकारी सेवाओं, सूचनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बहुभाषी AI के जरिए ऐसा वॉयस-फर्स्ट डिजिटल इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है, जहां भाषा सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में बाधा न बने।

डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमिताभ नाग ने शासन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और नागरिक सेवाओं में BHASHINI की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सरकार, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप्स और भाषा विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि कोंकणी समेत अन्य भारतीय भाषाओं का डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो सके।

कार्यशाला में BHASHINI App Mitra, BHASHINI Mitra और BHASHINI Pravakta सहित कई AI आधारित समाधान प्रदर्शित किए गए। इनमें अनुवाद (Translation), स्पीच रिकॉग्निशन, टेक्स्ट-टू-स्पीच, ट्रांसलिटरेशन और मल्टीलिंगुअल APIs का प्रदर्शन किया गया, जिन्हें सरकारी और नागरिक सेवाओं से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म में जोड़ा जा सकता है।

प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि BHASHINI के माध्यम से पर्यटन सेवाओं, सरकारी सूचनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक कई भाषाओं में आसान पहुंच उपलब्ध कराई जा सकती है, जिससे नागरिकों और पर्यटकों दोनों का डिजिटल अनुभव बेहतर होगा।

कार्यशाला में कोंकणी भाषा के डिजिटल विकास पर भी विशेष चर्चा हुई। इसमें सरकार, शिक्षाविदों, भाषा विशेषज्ञों और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से भाषाई डेटा का विस्तार, AI मॉडल को बेहतर बनाने और गोवा की जरूरतों के अनुरूप नई तकनीकी पहल विकसित करने पर विचार किया गया।

-(इनपुटःएजेंसी)