भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से बुधवार को लाओ जनवादी लोकतांत्रिक गणराज्य के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री थोंगसावन फोमविहाने ने राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। भारत की अपनी पहली यात्रा पर आए फोमविहाने का राष्ट्रपति ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं दोनों देश
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत और लाओ जनवादी लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध हैं, जो बौद्ध धर्म और रामायण की साझा विरासत में दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
पीएम मोदी की लाओस यात्रा का किया उल्लेख
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्टूबर 2024 में आसियान से जुड़े शिखर सम्मेलनों में भाग लेने के लिए लाओस गए थे। उस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति मिली।
व्यापार और निवेश में अपार संभावनाएं
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और लाओस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि हुई है, लेकिन व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा
द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), स्वास्थ्य, मेडिसीन, कृषि, सिंचाई, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत जैसे क्षेत्रों में लाओस के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि भारत नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अपने अनुभव भी साझा करने के लिए तैयार है।
विकास साझेदारी हुई और मजबूत
राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी लाओस के युवाओं की आकांक्षाओं और देश की सामाजिक-आर्थिक विकास आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ रही है।
लोगों के हित में और गहरा होगा सहयोग
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और लाओस के बीच घनिष्ठ सहयोग से दोनों देशों के लोगों को व्यापक लाभ मिलेगा। उन्होंने भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। (इनपुट: पीआईबी)


