मध्य प्रदेश को टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मिला 15,896 करोड़ रुपये का भारी निवेश

मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर में आयोजित ‘टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0’ के दौरान 15,896 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे राज्य में 64,085 नई रोजगार संभावनाएं उत्पन्न होंगी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को कहा कि मध्य प्रदेश अब स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक नई छलांग लगाने जा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि भोपाल में 2,000 एकड़ भूमि पर नॉलेज और एआई सिटी विकसित की जाएगी, जो आधुनिक हाई-टेक और साइबर सिटी के मॉडल पर आधारित होगी।

सीएम यादव ने कहा, “विश्वस्तरीय संस्थान, रिसर्च सेंटर और स्टार्टअप्स यहां एक साथ आएंगे, जिससे मध्य प्रदेश भारत का एआई हब बनेगा।” उन्होंने इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कहीं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ‘साइंस सिटी प्रोजेक्ट’ के लिए 25 एकड़ भूमि आवंटित करने की योजना है, जहां विज्ञान, इनोवेशन और टेक्नोलॉजिकल रिसर्च की अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी।

उन्होंने कहा कि ‘टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव’ राज्य को भारत के उभरते तकनीकी मानचित्र के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। प्रगतिशील नीतियाँ, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेशक-हितैषी माहौल और कुशल मानव संसाधन मध्य प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहे हैं।

कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने निवेश और उद्योग विकास को बढ़ावा देने के लिए नौ कंपनियों को भूमि आवंटन हेतु इरादा पत्र जारी किए। उन्होंने बताया कि ये इकाइयाँ कुल 10.61 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी और लगभग 740 रोजगार उत्पन्न करेंगी।

इसके साथ ही राज्य सरकार ने सात उद्योगों के साथ निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए एमओयू भी किए, जिनसे करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश आएगा और 10,500 नई नौकरियां सृजित होंगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘ड्रोन डेटा रिपॉजिटरी’ का उद्घाटन भी किया। यह पहल भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन, वन संरक्षण, सिंचाई और आपदा प्रबंधन में ड्रोन-आधारित डाटा के उपयोग को बढ़ावा देगी।

उन्होंने ‘मध्य प्रदेश स्पेस टेक पॉलिसी–2025’ का ड्राफ्ट भी जारी किया, जिसका उद्देश्य राज्य को भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाना है। इस नीति से शोध, निवेश, रोजगार और वैज्ञानिक–आर्थिक प्रगति के नए अवसर खुलेंगे।