पीएमजीकेएवाई में बड़ा डिजिटल बदलाव, चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली में सीबीडीसी आधारित डीबीटी शुरू

भारत सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली में केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) कार्यक्रम शुरू किया है। नई व्यवस्था में खाद्य सब्सिडी पात्र लाभार्थियों के पारंपरिक बैंक खातों में भेजने के बजाय सीधे उनके डिजिटल रुपए वॉलेट में हस्तांतरित की जाएगी। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इसे विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि “हर दाना, हर रुपया, हर अधिकार” सही लाभार्थी तक पहुंचे।

डिजिटल रुपए वॉलेट में पहुंचेगी सब्सिडी

नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को मिलने वाली खाद्य सब्सिडी सीधे उनके सीबीडीसी वॉलेट में जमा होगी। इस राशि का इस्तेमाल सूचीबद्ध व्यापारियों से खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जा सकेगा। डिजिटल भुगतान प्रणाली सुरक्षित और ट्रैक करने योग्य होगी, जिससे सब्सिडी के इस्तेमाल की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।

स्मार्टफोन और फीचर फोन दोनों पर सुविधा

इस प्रणाली को अलग-अलग तरह के मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभ बनाया गया है। स्मार्टफोन उपयोगकर्ता क्यूआर कोड के जरिए भुगतान कर सकेंगे, जबकि फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए ओटीपी आधारित सुविधा उपलब्ध होगी। इससे डिजिटल भुगतान की पहुंच को व्यापक बनाने में मदद मिलेगी।

तत्काल और पारदर्शी होगा सब्सिडी हस्तांतरण

सीबीडीसी आधारित व्यवस्था से खाद्य सब्सिडी के तत्काल हस्तांतरण, उद्देश्य-आधारित उपयोग और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए लेन-देन की बेहतर ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही नकदी निकालने और नकदी संभालने पर निर्भरता कम होगी तथा सब्सिडी के इस्तेमाल में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ेगी।

प्रल्हाद जोशी बोले- पात्र लाभार्थी न छूटे

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सीबीडीसी आधारित डीबीटी विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य पात्र लाभार्थियों का उचित लक्ष्यीकरण करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी हकदार व्यक्ति लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि डीबीटी व्यवस्था से भ्रष्टाचार कम करने और लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंचाने में मदद मिली है। उन्होंने दावा किया कि डीबीटी के माध्यम से 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत हुई है। जोशी ने एआई आधारित समाधान ‘आशा’ का भी उल्लेख किया, जिसके तहत खाद्यान्न की गुणवत्ता और लाभार्थियों को उनके हक के अनुसार लाभ मिलने से संबंधित प्रतिक्रिया लेने के लिए कॉल किए जाते हैं।

गुलाब चंद कटारिया ने पारदर्शिता पर दिया जोर

पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सीबीडीसी की शुरुआत से गरीब और वंचित लाभार्थियों को मिलने वाले सम्मान और गरिमा को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे व्यापारियों को भी अधिक पारदर्शी और कुशल डिजिटल प्रणाली का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के डिजिटलीकरण से हेराफेरी और गबन की संभावनाएं कम हुई हैं और यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि सरकारी लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचे।

शिवराज सिंह चौहान बोले- खाद्य सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने देश में खाद्यान्न की बेहतर उपलब्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ आवश्यकता पड़ने पर खाद्यान्न निर्यात करने के लिए भी पर्याप्त भंडार है। उन्होंने कहा कि सीबीडीसी की प्रोग्रामेबल प्रकृति खाद्य सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि लाभ इच्छित लाभार्थियों तक पहुंचे। चौहान ने इस पहल को देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तार देने का सुझाव दिया।

वन नेशन वन राशन कार्ड से जुड़ी पहल

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने कहा कि विभाग ने पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इनमें वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) के माध्यम से राशन की पोर्टेबिलिटी और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से 8 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि ओएनओआरसी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जनधन, आधार और मोबाइल बने डिजिटल वित्तीय समावेशन के आधार

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने कहा कि सीबीडीसी आधारित डीबीटी भारत की डिजिटल वित्तीय समावेशन यात्रा का अगला स्वाभाविक कदम है। यह जनधन खाते, आधार और मोबाइल फोन जैसे तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित व्यवस्था को आगे बढ़ाता है। उन्होंने बताया कि देश में 59 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 3.10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की जमा राशि है। इसी डिजिटल वित्तीय ढांचे के आधार पर यूपीआई का विस्तार हुआ है। जुलाई 2026 में यूपीआई ने 30 लाख करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के 2,400 करोड़ से ज्यादा लेन-देन संसाधित किए।

गुजरात और पुडुचेरी के बाद चंडीगढ़ में विस्तार

चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली देश के पहले ऐसे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं, जहां सभी पात्र पीएमजीकेएवाई लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल सीबीडीसी यानी डिजिटल रुपए टोकन के रूप में खाद्य सब्सिडी सीधे उनके सीबीडीसी वॉलेट में हस्तांतरित करने की शुरुआत की गई है। यह पहल गुजरात और पुडुचेरी में किए गए पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव पर आधारित है। सीबीडीसी आधारित खाद्य सब्सिडी वितरण का पहला पायलट 15 फरवरी 2026 को गुजरात में और इसके बाद 26 फरवरी 2026 को पुडुचेरी में शुरू किया गया था। इन पायलट परियोजनाओं से मिले अनुभव के आधार पर अब इसे चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली तक विस्तारित किया गया है।

बिचौलियों की भूमिका कम करने की कोशिश

इस मॉडल में सब्सिडी सीधे सीबीडीसी वॉलेट में पहुंचने के कारण राशि के इस्तेमाल को उद्देश्य-आधारित बनाया गया है। लाभार्थी सूचीबद्ध दुकानों पर डिजिटल भुगतान के माध्यम से खाद्यान्न खरीद सकेंगे। सरकार के अनुसार, इससे नकदी के गबन, हेराफेरी और अनधिकृत लेन-देन की संभावनाओं को कम करने के साथ सब्सिडी के उपयोग की निगरानी बेहतर हो सकेगी।

कल्याणकारी योजनाओं में सीबीडीसी का पहला व्यापक प्रयोग

यह पहल केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में सीबीडीसी के पहले व्यापक अनुप्रयोग के रूप में सामने आई है। डीबीटी की प्रत्यक्षता और सीबीडीसी की प्रोग्रामेबल क्षमता को मिलाकर तैयार यह मॉडल सार्वजनिक धन को लाभार्थियों तक तेजी से पहुंचाने और उसके निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल को सुनिश्चित करने की कोशिश करता है।

दूसरे राज्यों के लिए बनेगा विस्तार योग्य मॉडल

सरकार ने इस परियोजना को देश के लिए एक अवधारणा के प्रमाण और दूसरे राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विस्तार योग्य मॉडल के रूप में देखा है। इसके जरिए कल्याणकारी योजनाओं में सीबीडीसी के एकीकरण से जुड़े परिचालन अनुभव हासिल होने की उम्मीद है। साथ ही यह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत करने और तकनीक के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं उपलब्ध कराने के सरकार के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगा।

डिजिटल पीडीएस की मजबूत नींव पर नई व्यवस्था

सीबीडीसी आधारित पहल पहले से लागू डिजिटल पीडीएस सुधारों की नींव पर तैयार की गई है। इनमें राशन कार्ड और लाभार्थी डेटाबेस का डिजिटलीकरण, आधार आधारित सत्यापन, ई-पीओएस प्रमाणीकरण, ऑनलाइन आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और वन नेशन वन राशन कार्ड के तहत देशव्यापी पोर्टेबिलिटी शामिल हैं। राइटफुल टारगेटिंग, स्मार्ट-पीडीएस, निर्मल, वीएलटीएस और सक्षम जैसी पहलों के जरिए सरकार डेटा आधारित निगरानी, पारदर्शिता और अंतिम छोर तक वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। सीबीडीसी आधारित डीबीटी को इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य अधिक कुशल, जवाबदेह और लाभार्थी-केंद्रित खाद्य वितरण प्रणाली तैयार करना है। (इनपुट: पीआईबी)