तमिलनाडु के किसानों को बड़ी राहत, खोपरा और तोतापुरी आम की सरकारी खरीद को मंजूरी

केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के खोपरा और तोतापुरी आम उत्पादक किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए उनकी उपज की सरकारी खरीद को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की स्वीकृति से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत बेहतर दाम मिल सकेंगे, जिससे उन्हें बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

87,226 मीट्रिक टन खोपरा की होगी एमएसपी पर खरीद

केंद्र सरकार ने तमिलनाडु सरकार के प्रस्ताव के आधार पर वर्ष 2026 के लिए 87,226 मीट्रिक टन खोपरा की सरकारी खरीद को मंजूरी दी है। इसमें 87,000 मीट्रिक टन मिलिंग खोपरा और 226 मीट्रिक टन बाल खोपरा शामिल हैं। यह खरीद मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी। स्वीकृत खरीद का कुल एमएसपी मूल्य 1,049.16 करोड़ रुपये से अधिक है।

खोपरा उत्पादकों को मिलेगा लाभकारी मूल्य

इस फैसले से खोपरा उत्पादक किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होगा। साथ ही बाजार में कीमतों में गिरावट की स्थिति में किसानों को नुकसान उठाकर फसल बेचने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। सरकार की खरीद व्यवस्था किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी।

96,879 मीट्रिक टन तोतापुरी आम की भी होगी खरीद

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तमिलनाडु के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों के लिए भी बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के तहत 96,879 मीट्रिक टन आम की खरीद को मंजूरी दी है। इसके लिए बाजार हस्तक्षेप मूल्य 1,545.41 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

बाजार में गिरते दाम से किसानों को मिलेगी राहत

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिले तथा बाजार में अचानक कीमतें गिरने पर उन्हें घाटे में फसल बेचने की मजबूरी का सामना न करना पड़े। यह कदम किसानों की आय को स्थिर रखने में भी सहायक होगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

खोपरा और तोतापुरी आम की बड़ी मात्रा में सरकारी खरीद की मंजूरी तथा हजार करोड़ रुपये से अधिक के एमएसपी मूल्य की सुरक्षा को तमिलनाडु के किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि ऐसे निर्णय किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। (इनपुट: पीआईबी)