मैंग्रोव वन क्षेत्र में 16.68 वर्ग किमी की वृद्धि, MISHTI योजना से तटीय संरक्षण को मिला बढ़ावा

केंद्र सरकार ने देश में मैंग्रोव वनों के संरक्षण और विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लोकसभा में सोमवार को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित उत्तर में बताया कि इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) 2023 के मुताबिक, भारत में कुल मैंग्रोव क्षेत्रफल 4,991.68 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 0.15% है। वहीं साल 2019 और 2023 के आंकड़ों की तुलना में देश में मैंग्रोव क्षेत्र में 16.68 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।

राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक आंध्र प्रदेश में मैंग्रोव क्षेत्र 404 से बढ़कर 421.43 वर्ग किमी जबकि गोवा में यह 26 से बढ़कर 31.34 वर्ग किमी हो गया है। वहीं गुजरात में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जहां मैंग्रोव कवर 1177 से घटकर 1164.06 वर्ग किमी हो गई है। जबकि कर्नाटक में 10 से 14.20 , केरल में 9 से 9.45 , ओडिशा में 251 से 259.06, पश्चिम बंगाल में 2112 से 2119.16, दमन और दीव में 3 से 3.86, और पुडुचेरी 2 से बढ़कर 3.83 वर्ग किमी हो गई है। वहीं महाराष्ट्र 320 से घटकर 315.09, तमिलनाडु 45 से 41.91, और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 616 से घटकर 608.29 वर्ग किलोमीटर रह गई है।

सरकार ने बजट 2023-24 के तहत MISHTI (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes) योजना की शुरुआत 5 जून 2023 को की थी। इसका उद्देश्य भारत के समुद्री किनारों पर मैंग्रोव वनों का विकास और वनीकरण करना है, ताकि इन अनोखे पारिस्थितिक तंत्रों को संरक्षित किया जा सके और तटीय निवासों की स्थिरता को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत 2019 की तटीय क्षेत्र विनियमन अधिसूचना (CRZ) में मैंग्रोव को इकोलाॅजिकली संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Areas – ESA) घोषित किया गया है, जहां केवल सीमित गतिविधियों की अनुमति होती है। अगर किसी विकास कार्य के दौरान 1,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में मैंग्रोव प्रभावित होते हैं, तो CRZ-IA के तहत 50 मीटर का बफर जोन बनाना अनिवार्य है। साथ ही, जितने मैंग्रोव नष्ट होते हैं, उनके तीन गुना पुन: रोपण का प्रावधान भी है।

मैंग्रोव क्षेत्रों की रक्षा वन संरक्षण अधिनियम, 1980; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और विभिन्न राज्यों के संबंधित कानूनों के तहत भी की जाती है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से भारत के मैंग्रोव वन और तटीय इकोसिस्टम लंबे समय तक सुरक्षित और स्थायी रहेंगे।-(PIB)

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