उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने गुरुवार को मणिपुर के विकास रोडमैप पर तीसरी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई, नए अवसरों की पहचान की गई और राज्य की विकास प्राथमिकताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विज़न के अनुरूप लाने पर ज़ोर दिया गया।
बैठक की एक प्रमुख विशेषता मणिपुर पोलो को फिर से जीवंत करने की पहल रही — इसे न सिर्फ एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में, बल्कि वैश्विक पहचान के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। सिंधिया ने बताया कि मणिपुर को दोबारा भारत की ‘पोलो राजधानी’ बनाने के लिए विश्वस्तरीय कोचिंग सुविधाएं और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
यह पहल स्पोर्ट्स-लिंक्ड टूरिज्म, स्थानीय युवाओं के सशक्तिकरण और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम साबित होगी। इसे सस्टेनेबल टूरिज्म और ग्रामीण उद्यमिता से भी जोड़ा जाएगा।
मंत्री ने मणिपुर के हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को मज़बूत करने के लिए चल रही पहलों की भी समीक्षा की। उन्होंने राज्य में 250 मिनी और 200 मेगा प्रोडक्शन यूनिट्स स्थापित करने की घोषणा की और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs) को सहयोग देने की बात कही, ताकि स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को आर्थिक मज़बूती मिल सके।
सिंधिया ने कहा कि ये कदम मणिपुर की पारंपरिक कला को संरक्षित रखने और नए रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेंगे, जिससे राज्य एक क्रिएटिव एंटरप्राइज हब के रूप में उभरेगा।
उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर ज़ोर देते हुए इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क और इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड डिजाइन स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की, जिससे नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।
मंत्री ने बताया कि वाइब्रेंट विलेजेज योजना को पीएम गति शक्ति फ्रेमवर्क से जोड़ा जाएगा ताकि ग्रामीण पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मज़बूत किया जा सके।
कृषि क्षेत्र में, सिंधिया ने पाम ऑयल खेती की प्रगति की समीक्षा की और अगले चार वर्षों में 10,000 हेक्टेयर में इसे विस्तार देने का लक्ष्य तय किया, जिससे कृषि आधारित आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने अधिकारियों को लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक अवसंरचना परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने और निजी निवेश आकर्षित करने के निर्देश दिए ताकि मणिपुर की आर्थिक क्षमता को पूरी तरह उपयोग में लाया जा सके।
सिंधिया ने कहा कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र मंत्रालय (MDoNER) एक सक्रिय सुगमकर्ता (facilitator) के रूप में काम करता रहेगा ताकि मणिपुर का विकास समावेशी, टिकाऊ और जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप बना रहे।
यह बैठक मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, DoNER मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और मणिपुर सरकार के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुई। यह सत्र वर्ष की पिछली दो समीक्षा बैठकों के परिणामों पर आधारित रहा।
सिंधिया ने कहा कि मणिपुर अपनी संस्कृति, उद्यमशीलता और सामुदायिक शक्ति के बल पर आत्मनिर्भर भारत के विज़न के तहत आत्मनिर्भरता और विकास का एक नया प्रतीक बनता जा रहा है।


