रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्री खतरे अब तकनीकी और बहुआयामी हो गए हैं। उन्होंने चेताया कि जीपीएस स्पूफिंग, रिमोट कंट्रोल बोट, एन्क्रिप्टेड संचार, ड्रोन और डार्क वेब जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर अपराधी समुद्री गतिविधियां चला रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि पारंपरिक तरीकों से काम नहीं चलेगा और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन आधारित निगरानी, साइबर डिफेंस और ऑटोमेटेड सिस्टम्स को तुरंत शामिल करना होगा। रक्षा मंत्री 29 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारतीय तटरक्षक मुख्यालय में आयोजित 42वीं भारतीय तटरक्षक कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बातें कहीं। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार भारत की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और इसमें किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक साथ देखने की आवश्यकता है।
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय तटरक्षक बल अपनी स्थापना के समय सीमित संसाधनों से शुरू होकर आज 152 जहाजों और 78 विमानों के साथ एक मजबूत संगठन बन चुका है। अब तक इस बल ने 1,638 विदेशी पोतों और 13,775 विदेशी मछुआरों को अवैध गतिविधियों में पकड़ा है और 6,430 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए हैं। इन मादक पदार्थों की कीमत 37,833 करोड़ रुपये आंकी गई है। केवल इस वर्ष जुलाई तक ही 76 खोज और बचाव अभियानों में 74 लोगों की जान बचाई गई। स्थापना से अब तक तटरक्षक बल 14,500 से अधिक लोगों का जीवन सुरक्षित कर चुका है।
उन्होंने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल बाहरी और आंतरिक दोनों सुरक्षा मोर्चों पर सक्रिय है। यह अवैध मछली पकड़ने, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी, मानव तस्करी, समुद्री अपराध और प्रदूषण पर नियंत्रण करने में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही, चक्रवात, तेल रिसाव, औद्योगिक दुर्घटनाओं और विदेशी जहाजों की परेशानी में मानवीय दृष्टिकोण से तुरंत प्रतिक्रिया देता है। वहीं रक्षा मंत्री ने महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि अब महिलाएं सहयोगी भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पायलट, ऑब्जर्वर, हवरक्राफ्ट ऑपरेटर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक्स और विधि अधिकारी के रूप में अग्रिम पंक्ति में सेवा दे रही हैं। उन्होंने इसे समावेशी भागीदारी का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि अब युद्ध महीनों में नहीं बल्कि घंटों और सेकंडों में तय हो रहे हैं, जहां उपग्रह, ड्रोन और सेंसर निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में भारतीय तटरक्षक बल को त्वरित प्रतिक्रिया, आधुनिक तकनीक और लचीलापन अपनाना होगा। उन्होंने बल से 2047 तक के लिए एक भविष्यवादी रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया। राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार तटरक्षक के आधुनिकीकरण पर लगभग 90 प्रतिशत पूंजीगत बजट स्वदेशी साधनों पर खर्च कर रही है। अब जहाज और विमान निर्माण, मरम्मत और रखरखाव भारत में ही हो रहे हैं, जिससे सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ जहाज निर्माण उद्योग और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। सम्मेलन में परिचालन प्रदर्शन, लॉजिस्टिक्स, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसमें रक्षा मंत्रालय और तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें इंजीनियर-इन-चीफ भी शामिल हैं, भाग ले रहे हैं।-(IANS)


