पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी द्वारा लिखित एक लेख साझा किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी द्वारा लिखित एक लेख साझा किया, जिसमें बताया गया है कि कार्बन कैप्चर तकनीक भारत की अगली इस्पात क्रांति को कैसे शक्ति प्रदान कर सकती है। पीएम मोदी ने कहा, “केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी लिखते हैं कि नेट जीरो 2070 के लक्ष्य, रणनीतिक निवेश, हाइड्रोजन पहल और अन्य कई क्षेत्रों में हमारे निर्देशित प्रयास विकास, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विकसित भारत की राह को गति प्रदान करेंगे!”

एच.डी. कुमारस्वामी का लेख एक समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ है। जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर साझा किया गया है। पीएम मोदी ने कुमारस्वामी के इस लेख का जिक्र करते हुए लिखा कि भारत का लौह एवं इस्पात क्षेत्र एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक देश है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने लगभग 152 मिलियन टन स्टील का उत्पादन किया। सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक 300 मिलियन टन और 2047 तक 500 मिलियन टन उत्पादन क्षमता हासिल करना है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने लेख में बताया कि स्टील बनाना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बहुत अधिक ऊर्जा लगती है और इससे ज्यादा मात्रा में प्रदूषण भी होता है। भारत में अभी भी ज्यादातर स्टील कोयले की मदद से बनाया जाता है। इस कारण यह उद्योग देश के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में करीब 10 से 12 प्रतिशत का योगदान देता है।

इस चुनौती से निपटना न सिर्फ पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वच्छ स्टील उत्पादन की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि ‘ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी’ की शुरुआत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसमें कम प्रदूषण वाले स्टील के लिए खास मानक तय किए गए हैं। जिन स्टील उत्पादों में कम कार्बन उत्सर्जन होगा, उन्हें 3 से 5 स्टार रेटिंग देकर ‘ग्रीन स्टील’ माना जाएगा।

कुमारस्वामी ने इस बात पर भी जोर दिया कि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत स्टील मंत्रालय को 455 करोड़ रुपए दिए गए हैं, ताकि स्टील उत्पादन में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग शुरू किया जा सके। यह तकनीक भविष्य में स्टील बनाने के तरीके को बदल सकती है। ये सभी उपाय मिलकर इस बात को प्रमाणित करते हैं कि इस्पात को कार्बन मुक्त करना भारत की व्यापक जलवायु और औद्योगिक रणनीति का अभिन्न अंग है।

उन्होंने कहा कि कम कार्बन वाले स्टील उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्योग कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) की दिशा में भी काम कर रहा है। इस साल के केंद्रीय बजट में पांच क्षेत्रों, जिनमें स्टील भी शामिल है, में कार्बन कैप्चर तकनीक के परीक्षण के लिए 20,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

कार्बन कैप्चर तकनीक के जरिए स्टील फैक्ट्रियों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस को वातावरण में जाने से पहले ही कैप्चर करके सीसीयूएस तकनीक प्रदूषण उत्सर्जन में काफी कमी ला सकती है, साथ ही पुरानी फैक्ट्रियां भी काम करती रह सकेंगी। मंत्री ने कहा कि यह तकनीक भारत के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि देश में कई स्टील प्लांट आने वाले कई दशकों तक चलते रहेंगे। (इनपुट-आईएएनएस)

 

 

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