म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। इस संकट की घड़ी में भारतीय राहत दल की त्वरित कार्रवाई से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। वहीं भारतीय नौसेना और वायुसेना भी राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस मदद के लिए म्यांमार के स्थानीय लोगों ने भारत के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है, और भारतीय नेतृत्व के लिए आशीर्वाद की कामना कर रहे हैं।
एनडीआरएफ टीम की सदस्य कविता सिंह ने बताया कि गर्मी और समय बीतने के कारण जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना कम हो गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि तमाम बाधाओं और जोखिमों के बावजूद एनडीआरएफ टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ राहत अभियान चला रही है।
एक अन्य एनडीआरएफ सदस्य ने बताया कि 57 कर्मियों की टीम म्यांमार में बचाव कार्य में लगी हुई है और उन्हें 13 स्थानों पर काम सौंपा गया है। भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत म्यांमार को 625 मीट्रिक टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। एनडीआरएफ की 80 सदस्यीय शहरी खोज और बचाव (USAR) टीम को भारतीय वायुसेना (IAF) के C-130 हर्क्यूलिस विमान से दो दौर में भेजा गया।
इसके अलावा भारत ने चिकित्सा सहायता भी प्रदान की है। भारतीय सर्जनों ने म्यांमार में दो जीवनरक्षक सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। राहत कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे मांडले डिवीजन के लेफ्टिनेंट जनरल म्यो मो आंग ने भारत के प्रयासों की सराहना की।
भारतीय नौसेना के आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस सवित्री ने 40 टन राहत सामग्री लेकर 29 मार्च को यांगून के लिए प्रस्थान किया, जिसे 1 अप्रैल को सौंपा गया। इसके बाद आईएनएस करमुक और एलसीयू 52 ने 30 टन अतिरिक्त राहत सामग्री पहुंचाई गई।
वहीं विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत जरूरत के अनुसार और सहायता भेजने के लिए तैयार है। ऑपरेशन ब्रह्मा भारत की “पहला मददगार” की भूमिका को दर्शाता है, जिससे यह साबित होता है कि भारत अपने पड़ोस में प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।