म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग पांच दिवसीय भारत दौरे पर, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शनिवार से भारत की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना बताया गया है।

बोधगया से होगी यात्रा की शुरुआत

राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग अपनी भारत यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया से करेंगे। यह वही स्थान है, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, और हाल के वर्षों में कई विदेशी नेताओं की यात्रा का प्रमुख केंद्र रहा है।

पीएम मोदी से 1 जून को मुलाकात

विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 1 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत–म्यांमार संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।

पहली आधिकारिक भारत यात्रा

राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। उनके साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आएगा, जिसमें कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

बिजनेस फोरम में भी लेंगे हिस्सा

अपनी यात्रा के दौरान म्यांमार के राष्ट्रपति एक बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगे। इसके अलावा 2 जून को वे मुंबई में उद्योग और व्यापार से जुड़े कार्यक्रमों और साइट विजिट में शामिल होंगे।

भारत की नीतियों के तहत सहयोग पर जोर

विदेश मंत्रालय ने कहा कि म्यांमार भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीति के केंद्र में स्थित है। यह दौरा दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बौद्ध कूटनीति का बढ़ता प्रभाव

हाल के महीनों में बोधगया में विदेशी नेताओं की यात्राएं बढ़ी हैं। इससे पहले वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम ने भी अपनी भारत यात्रा की शुरुआत यहीं से की थी और महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।

पिछले संपर्कों की पृष्ठभूमि

इससे पहले अप्रैल में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने म्यांमार जाकर राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बधाई पत्र सौंपा था।

भारत–म्यांमार संबंधों की अहमियत

दोनों देश लंबे समय से करीबी पड़ोसी और साझेदार रहे हैं। भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से म्यांमार भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर पूर्वोत्तर क्षेत्र और समुद्री संपर्क के संदर्भ में। (इनपुट: आईएएनएस)

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