भारत की सांस्कृतिक परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृजन, निर्माण और शिल्प का देवता माना गया है। वे पूरे समाज के लिए एक नई संरचना गढ़ने वाले सृजक माने जाते हैं। मंदिरों से लेकर महलों तक, नगरों से लेकर औद्योगिक संरचनाओं तक विश्वकर्मा का नाम हर सृजनात्मक प्रयास का प्रतीक रहा है। संयोगवश 17 सितंबर दोहरी महत्ता रखता है। इस दिन एक ओर विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी है। अगर तिथियों के मेल से परे देखें तो एक गहरा संदेश नजर आता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आधुनिक भारत के उन्हीं विश्वकर्मा के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जिन्होंने भारत को नई आकृति, नई ऊर्जा और नया आत्मविश्वास दिया है।

गुजरात से दिल्ली तक निर्माण की निरंतर यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक उदय गुजरात से हुआ। वर्ष 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने राज्य की छवि को बदलने का संकल्प लिया। गुजरात को बिजली संकट, औद्योगिक ठहराव और ग्रामीण गरीबी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था लेकिन मोदी ने योजनाबद्ध तरीके से विकास का ऐसा खाका खींचा, जिसने गुजरात को ‘मॉडल स्टेट’ के रूप में प्रस्तुत किया।

ज्योति ग्राम योजना और बिजली क्रांति

तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का सपना देखा और उसे साकार भी किया। ज्योति ग्राम योजना ने न केवल किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली दी बल्कि गांवों में लघु उद्योग और शिक्षा की रोशनी भी फैलाई। यह कदम वास्तव में ग्रामीण भारत को नए युग की ओर ले जाने वाला साबित हुआ।

‘वाइब्रेंट गुजरात’ से खुले निवेश और औद्योगिक निर्माण के द्वार

गुजरात को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात समिट की शुरुआत की। यह आयोजन केवल निवेश जुटाने का प्रयास साबित नहीं हुई बल्कि राज्य को औद्योगिक कॉरिडोर, स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का एक संगठित प्रयास साबित हुआ।

सरदार सरोवर और जल प्रबंधन

नर्मदा परियोजना और उससे जुड़े सिंचाई तंत्र ने गुजरात के लाखों किसानों को राहत दी। जल संसाधनों का यह पुनर्निर्माण राज्य की कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। इन सब प्रयासों ने नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय स्तर पर ‘विकास पुरुष’ की छवि दी और यही छवि उन्हें 2014 में प्रधानमंत्री पद तक लेकर आई।

प्रधानमंत्री मोदी: विकास की परिभाषा को और व्यापक किया

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने विकास की परिभाषा को और व्यापक किया। उनके फैसले केवल तात्कालिक लाभ तक सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने भारत के विकास को भविष्य के अनुरूप गति देने का काम किया।

प्रधानमंत्री आवास योजना

‘हर गरीब को घर’ का सपना मोदी सरकार की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक रहा। करोड़ों परिवारों को पक्के घर मिले, जिनमें शौचालय, बिजली, पानी और गैस जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गईं। यह केवल आवास नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन का निर्माण था।

इंफ्रास्ट्रक्चर और गति शक्ति योजना

भारतमाला, सागरमाला, उच्च-गति वाले एक्सप्रेसवे, एयरपोर्टों का विस्तार और बुलेट ट्रेन परियोजना, ये सब भारत के परिवहन नेटवर्क को 21वीं सदी के अनुरूप बना रहे हैं। गति शक्ति योजना ने विभिन्न मंत्रालयों और परियोजनाओं को जोड़कर समन्वित विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया।

डिजिटल इंडिया और टेक्नोलॉजिकल निर्माण

पीएम मोदी ने डिजिटल इंडिया का नारा दिया और उसे गांव-गांव तक पहुंचाया। आज यूपीआई और डिजीलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म भारत की पहचान बन चुके हैं। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े उद्योगपति तक सभी के लिए लेन-देन आसान हुआ है।

मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत

भारत को विनिर्माण और उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए पीएम मोदी ने मेक इन इंडिया की शुरुआत की। रक्षा उत्पादन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तक, आज भारत आत्मनिर्भरता की राह पर है। कोविड-19 महामारी के दौरान आत्मनिर्भर भारत अभियान ने इस दिशा को और गति दी।

पीएम विश्वकर्मा योजना

मोदी मोदी ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू की। इस योजना के तहत बढ़ई, लोहार, सुनार, राजमिस्त्री जैसे कारीगरों को आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह सीधे-सीधे भगवान विश्वकर्मा की परंपरा को सम्मान देने जैसा है।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण

पीएम मोदी का विज़न केवल आर्थिक या औद्योगिक ढांचों तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक आत्मा को भी नए सिरे से गढ़ा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर निर्माण, अयोध्या में श्रीराम मंदिर, उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर का विस्तार और सौंदर्यीकरण, सोमनाथ से केदारनाथ तक कई धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया किया गया जिससे भारत की संस्कृति को नया जीवन मिला। इन कार्यों ने यह सिद्ध किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल विकासपुरुष नहीं बल्कि राष्ट्र की आत्मा के निर्माणकर्ता भी हैं।

ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का उदय

प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर भी नए सिरे से गढ़ा। जी-20 की अध्यक्षता, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, क्वाड जैसे मंचों पर भारत की भागीदारी और ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में भारत की भूमिका, ये सब दिखाते हैं कि पीएम मोदी ने भारत को ग्लोबल पॉलिटिक्स में केंद्रीय स्थान दिलाया। यह भी ‘विश्वकर्मा’ की भूमिका का विस्तार है जहां राष्ट्र का निर्माण केवल भीतर नहीं बल्कि ग्लोबल स्टेज पर भी होता है।

आधुनिक विश्वकर्मा की परिभाषा और नरेंद्र मोदी

यदि भगवान विश्वकर्मा को केवल इमारतें या औजार गढ़ने वाला देवता मानें तो वह अधूरा दृष्टिकोण होगा। विश्वकर्मा का अर्थ है वह शक्ति जो समाज, संस्कृति, राष्ट्र और भविष्य की नई संरचना गढ़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति को इसी दृष्टि से लिया। उन्होंने एक ओर जहां गरीबों को घर, सड़क, बिजली और पानी दिया वहीं दूसरी ओर आधुनिक हाईवे, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ग्लोबल कनेक्टिविटी की मजबूत नींव रखी। उन्होंने एक ओर पारंपरिक शिल्पकारों को सम्मान दिया तो दूसरी ओर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व के सामने प्रस्तुत किया।

ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधुनिक भारत का विश्वकर्मा कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि उन्होंने भौतिक विकास से लेकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक और स्थानीय निर्माण से लेकर वैश्विक पहचान तक हर स्तर पर भारत को नई संरचना दी है।

दरअसल, भारत आज जिस आत्मविश्वास और सृजनात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है उसमें पीएम मोदी की भूमिका विश्वकर्मा जैसी ही है।

-(वरिष्ठ पत्रकार अमित शर्मा की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़े हैं।)