भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिक सुरक्षित, सुगम और बेहतर बनाए रखने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने अत्याधुनिक नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) तैनात करने की पहल शुरू की है। उन्नत 3डी लेजर आधारित तकनीक से लैस ये वाहन अब देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखेंगे।
ये हाईटेक वाहन लेजर प्रोफाइलर, जीपीएस, उच्च-रिजॉल्यूशन कैमरों और 3डी लेजर सेंसर से सुसज्जित हैं। सड़क पर चलते हुए ये सड़क की सतह पर मौजूद दरारों, गड्ढों, उबड़-खाबड़ हिस्सों और अन्य खामियों की पहचान कर उनका डिजिटल मानचित्र तैयार करते हैं।
मंत्रालय के अनुसार, एनएसवी केवल सर्वेक्षण वाहन नहीं बल्कि सड़क गुणवत्ता के डिजिटल संरक्षक हैं। इनके माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति का विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा, जिससे सड़क मरम्मत और रखरखाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे।
प्रतिदिन 300 किलोमीटर तक सर्वेक्षण
पहले जहां एक दिन में केवल 20 से 80 किलोमीटर सड़क का सर्वेक्षण संभव था, वहीं नई तकनीक की मदद से अब एनएसवी प्रतिदिन 300 किलोमीटर तक सड़क का सर्वेक्षण कर सकते हैं। इससे सड़क संबंधी समस्याओं की पहचान और समाधान की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है।
तीन चरणों में डेटा प्रबंधन
सर्वेक्षण के दौरान एकत्र किया गया डेटा 48 घंटे के भीतर एन्क्रिप्ट कर केंद्रीय एनएसवी केंद्र को भेजा जाता है।
देशभर में पांच क्षेत्रों में तैनात विशेषज्ञ टीमें इस डेटा की निगरानी और विश्लेषण करती हैं।
इसके बाद 10 दिनों के भीतर कच्चे डेटा को उपयोगी रिपोर्ट में बदल दिया जाता है, जबकि पहले इस प्रक्रिया में चार से छह महीने तक का समय लगता था।
एआई आधारित निगरानी प्रणाली
एनएसवी द्वारा एकत्रित सभी आंकड़े सीधे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एआई आधारित डेटा लेक पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं। इससे विशेषज्ञों को त्वरित विश्लेषण और साक्ष्य आधारित मरम्मत निर्णय लेने में मदद मिलती है।
हर प्रकार के राजमार्ग का सर्वेक्षण
दो लेन से लेकर आठ लेन तक के राष्ट्रीय राजमार्गों, व्यस्त मालवाहक गलियारों, अधिक यातायात वाले मार्गों और मौसम की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जाएगा।
हर छह महीने में नियमित सर्वेक्षण सुनिश्चित करेगा कि सड़क की कोई भी खामी नजरअंदाज न हो।
मोबाइल ऐप से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई प्रणाली के तहत विकसित मोबाइल ऐप के माध्यम से साइट निरीक्षक वास्तविक समय में एनएसवी की रिपोर्ट देख सकेंगे, निरीक्षण के दौरान टिप्पणियां और जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड कर सकेंगे तथा मरम्मत कार्यों की प्रगति पर नजर रख सकेंगे।
इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
मरम्मत पूरी होने तक निगरानी
नई एनएसवी प्रणाली केवल खामियों की पहचान तक सीमित नहीं है। सड़क रखरखाव एजेंसियों को तब तक जिम्मेदार माना जाएगा जब तक रिपोर्ट की गई सभी कमियों को पूरी तरह दूर नहीं कर दिया जाता।
मंत्रालय का मानना है कि यह पहल राजमार्ग प्रबंधन में प्रतिक्रियात्मक व्यवस्था से सक्रिय और पूर्वानुमान आधारित व्यवस्था की ओर बड़ा बदलाव है। इससे सड़क संबंधी खामियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यात्रियों को अधिक सुरक्षित तथा आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।


