भारत की ऊर्जा रणनीति में प्राकृतिक गैस बनेगी अहम स्तंभ, 15% से ज्यादा होगा लक्ष्य

सरकार अब ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसके लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का इस्तेमाल बढ़ाने, गैस आधारित बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने और CBG, हाइड्रोजन व LNG मोबिलिटी जैसे नए अवसरों पर काम किया जा रहा है।

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा ने ASSOCHAM इंडिया गैस इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्फ्रेंस में कहा, “इंडस्ट्री और नीतिगत सहयोग के जरिए हम प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से भी अधिक कर सकते हैं और हर घर तक सस्ती व स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाना संभव बना सकते हैं।”

उन्होंने LPG से PNG पर स्थानांतरण को लेकर हो रही प्रगति का जिक्र किया और कहा कि ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है। मिश्रा ने कहा कि बिजली उत्पादन में प्राकृतिक गैस की भूमिका को बढ़ाना जरूरी है ताकि भारत का विकास टिकाऊ और कार्बन-न्यूट्रल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सके।

उन्होंने बताया कि बीते कुछ सालों में सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब तक 300 से अधिक भौगोलिक क्षेत्रों को अनुमति दी गई है, ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बनाई गई है और व्यापार सुगमता को बढ़ावा दिया गया है।

ASSOCHAM टास्क फोर्स ऑन हाइड्रोकार्बन्स के सह-अध्यक्ष और पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के एमडी अखिल मेहरोत्रा ने कहा कि शहरों में गैस नेटवर्क के तेजी से विस्तार की जरूरत है। उन्होंने “गैस टू पावर” रणनीति, नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण और मज़बूत मोबिलिटी इकोसिस्टम पर जोर दिया।

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के डायरेक्टर (कमर्शियल) मोहित भाटिया ने कहा कि ऊर्जा मिश्रण में 2030 तक 15 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि साझा मिशन है। उन्होंने बताया कि हर नई पाइपलाइन, CNG स्टेशन और घरेलू कनेक्शन देश को साफ हवा, स्वस्थ समुदाय और प्रतिस्पर्धी उद्योगों की ओर ले जा रहा है।

भाटिया ने यह भी कहा कि भारत पहले ही दुनिया का चौथा सबसे बड़ा LNG आयातक बन चुका है। उन्होंने कहा कि री-गैसीफिकेशन क्षमता का विस्तार, SSLNG हब और पारदर्शी गैस एक्सचेंज भविष्य को नया आकार देंगे। प्राकृतिक गैस को “ब्रिज फ्यूल” बताते हुए उन्होंने कहा कि यह उद्योगों के उत्सर्जन घटाने, लॉजिस्टिक्स को आधुनिक बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाएगी।

– (इनपुट : आईएएनएस)