राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority (NBA) ने राज्य जैव-विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव-विविधता परिषदों के जरिए लाभार्थियों के बीच 45.05 लाख रुपए का वितरण किया है। इस भुगतान से 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित 90 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) और आंध्र प्रदेश के 15 लाल चंदन किसानों को लाभ मिलेगा।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और लद्दाख शामिल हैं। ये बीएमसी विभिन्न पारिस्थितिक और संस्थागत परिवेशों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनमें गांव, शहरी स्थानीय निकाय, मैंग्रोव क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, हाल के वर्षों में, एनबीए ने पारदर्शिता को बढ़ाने और व्यापार सुगमता के लिए सरल नियम लागू किए हैं, साथ ही समुदायों के हितों की रक्षा और जैव विविधता संरक्षण को प्राथमिकता देना जारी रखा है। जैव विविधता को स्थायी रूप से उपयोग में लाने और इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एनबीए विभिन्न हितधारकों जैसे राज्यों, स्थानीय निकायों, शोधकर्ताओं, उद्योगों और समुदायों के साथ मिलकर काम करता है।
यह जमीनी स्तर पर पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित रखते हुए जन जैव-विविधता रजिस्टरों का दस्तावेजीकरण और सहभागितात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से जैव-विविधता के प्रबंधन का समर्थन करता है। इन प्रयासों के चलते, कुल एबीएस भुगतान 145 करोड़ रुपए (लगभग 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो गया है।


