एनईपी 2020 भविष्य की शिक्षा प्रणाली की मजबूत नींव: डॉ. सुकांत मजूमदार

केंद्रीय शिक्षा एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 देश में समावेशी, कौशल-केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणाली की मजबूत नींव रख रही है। उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र प्रायोजित शिक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और केंद्र-राज्य समन्वय को आवश्यक बताया। वह नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी) में आयोजित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

केंद्र और राज्यों के समन्वय पर जोर

डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा कि केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मिलकर शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करना होगा, ताकि प्रत्येक बच्चे, शिक्षक और विद्यालय को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन बेहद महत्वपूर्ण है।

‘पीएम पोषण’ और ‘तिथि भोजन’ की भूमिका अहम

केंद्रीय मंत्री ने बच्चों, विशेषकर वंचित और हाशिये पर रहने वाले समुदायों के विद्यार्थियों के पोषण स्तर में सुधार के लिए ‘पीएम पोषण’ और ‘तिथि भोजन’ जैसी पहलों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से गुणवत्ता, समानता और समावेशन को प्राथमिकता देते हुए स्कूली शिक्षा को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।

समग्र शिक्षा और पीएम पोषण पर हुई समीक्षा

सम्मेलन के दूसरे दिन ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म के तहत समग्र शिक्षा और ‘पीएम पोषण’ योजना के प्रमुख घटकों की समीक्षा की गई। विभिन्न सत्रों में प्रस्तुतियां दी गईं, जिनके बाद राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों एवं अधिकारियों ने अपने सुझाव साझा किए। साथ ही, केंद्र प्रायोजित योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और सीखने के परिणामों में सुधार पर विस्तृत चर्चा हुई।

अनुभव साझा करने का मिला मंच

सम्मेलन ने केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपने अनुभव साझा करने, कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा करने और शिक्षा योजनाओं के प्रभावी संचालन को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया। सभी प्रतिभागियों ने प्रत्येक विद्यार्थी के लिए समान, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के सामूहिक संकल्प को दोहराया।

विभिन्न योजनाओं पर हुई प्रस्तुतियां

सम्मेलन में स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के अपर सचिव धीरज साहू ने ‘पीएम श्री’ योजना, अपर सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी ने ‘उल्लास’, आर्थिक सलाहकार ए. श्रीजा ने समावेशी शिक्षा, संयुक्त सचिव प्राची पांडे ने कौशल शिक्षा तथा संयुक्त सचिव आशीष जोशी ने ‘पीएम पोषण’ योजना पर प्रस्तुतियां दीं। संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल और शिक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में उपस्थित रहे। (इनपुट: पीआईबी)

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