केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एनईएसएसी) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूर्वोत्तर के सामाजिक-आर्थिक विकास को मजबूती देने वाली महत्वपूर्ण संस्था बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि एनईएसएसी भारत-म्यांमार सीमा और पूर्वोत्तर के अंतर-राज्यीय सीमावर्ती क्षेत्रों के भू-स्थानिक मानचित्रण सहित लगभग 130 अंतरिक्ष अनुप्रयोग परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
सीमा प्रबंधन और भू-स्थानिक मानचित्रण पर विशेष फोकस
मेघालय के उमियाम स्थित एनईएसएसी के दौरे के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत-म्यांमार सीमा और पूर्वोत्तर के अंतर-राज्यीय क्षेत्रों का भू-स्थानिक मानचित्रण तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा, संसाधन प्रबंधन और बेहतर प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
करीब 130 अंतरिक्ष अनुप्रयोग परियोजनाओं पर काम
एनईएसएसी के निदेशक डॉ. एस.पी. अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री को संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान लगभग 130 परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, जिनमें 50 परियोजनाएं हाल ही में पूरी हुई हैं, जबकि 78 परियोजनाएं कृषि, वानिकी, जल संसाधन, भूविज्ञान, शहरी एवं क्षेत्रीय योजना, भू-सूचना विज्ञान, उपग्रह संचार, यूएवी तकनीक, अंतरिक्ष एवं वायुमंडलीय विज्ञान, आपदा प्रबंधन और क्षमता निर्माण से संबंधित हैं।
अंतरिक्ष तकनीक से विकास योजनाओं को मिल रही गति
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एनईएसएसी अत्याधुनिक वैज्ञानिक क्षमताओं और पूर्वोत्तर के आठ राज्यों की विकास आवश्यकताओं के बीच मजबूत सेतु का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के साथ बढ़ते सहयोग से अंतरिक्ष तकनीक योजना निर्माण, शासन, संसाधन प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर रही है।
बांस मानचित्रण और आजीविका पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने एनईएसएसी, उत्तर पूर्व गन्ना एवं बांस विकास परिषद (NECBDC) और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बांस संसाधनों का वैज्ञानिक मानचित्रण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगा, संसाधनों की बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा और क्षेत्र में स्थायी आजीविका के नए अवसर पैदा करेगा।
बाढ़ पूर्व चेतावनी और जल सुरक्षा को मजबूत करने की अपील
डॉ. जितेंद्र सिंह ने एनईएसएसी की बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक तथा स्थान-विशिष्ट बनाने पर जोर दिया। उन्होंने चेरापूंजी स्थित रामकृष्ण मिशन के जल संचयन मॉडल जैसे सफल प्रयासों को व्यापक स्तर पर अपनाने की भी अपील की, ताकि पूर्वोत्तर में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
भू-पर्यटन और साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर
उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग रणनीतिक सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ पर्यटन विकास में भी किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘मंज़िल एनई’ डैशबोर्ड को मजबूत करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई। साथ ही केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और निजी उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया।
विज्ञान और तकनीक से मजबूत होगा पूर्वोत्तर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत के सबसे गतिशील विकास क्षेत्रों में शामिल हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि एनईएसएसी अपने अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों के जरिए शासन को मजबूत करने, आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और तकनीक आधारित समावेशी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। (इनपुट: पीआईबी)


