वैज्ञानिकों ने क्वांटम भौतिकी में एक ऐसे आश्चर्यजनक व्यवहार का पता लगाया है, जो यह दर्शाता है कि कभी-कभी विपरीत अवस्थाओं में तैयार किए गए दो कण, समान अवस्थाओं वाले कणों की तुलना में अधिक जानकारी दे सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में क्वांटम उपकरणों के परीक्षण और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी तकनीकों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।
क्वांटम भौतिकी की मूलभूत सीमा पर नया दृष्टिकोण
क्वांटम भौतिकी में किसी प्रणाली के सभी गुणों को एक साथ पूरी सटीकता से जान पाना संभव नहीं होता। इस सीमा को बोहर का पूरकता सिद्धांत कहा जाता है। यह सिद्धांत बताता है कि कुछ क्वांटम गुणों को एक साथ पूरी परिशुद्धता के साथ मापा नहीं जा सकता।
इसके प्रसिद्ध उदाहरणों में डबल-स्लिट प्रयोग में पथ सूचना और व्यतिकरण दृश्यता के बीच संतुलन, या स्थिति और संवेग जैसी गैर-परिवर्तनशील प्रेक्षणीयताओं का संयुक्त मापन शामिल है।
समानांतर और विपरीत समानांतर स्पिन पर अध्ययन
एस. एन. बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र, बालागढ़ विजॉय कृष्ण महाविद्यालय और भारतीय सांख्यिकी संस्थान के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में यह जांच की कि क्वांटम कणों के युग्म दिए जाने पर उनके स्पिन की विभिन्न विशेषताओं को कितनी सटीकता से मापा जा सकता है।
इन युग्मों को दो अलग-अलग तरीकों से तैयार किया गया। पहले प्रकार में दोनों स्पिन एक ही दिशा में रखे गए, जिसे समानांतर अवस्था कहा गया, जबकि दूसरे प्रकार में दोनों स्पिन एक-दूसरे के विपरीत दिशा में थे, जिसे विपरीत समानांतर अवस्था कहा गया है।
सामान्य रूप से यह माना जा सकता है कि समान अवस्थाओं की दो प्रतियां अधिक उपयोगी होंगी, क्योंकि वे अधिक जानकारी देंगी। लेकिन क्वांटम यांत्रिकी में परिणाम इसके उलट सामने आए।
विपरीत समानांतर स्पिन ने दिखाया बेहतर प्रदर्शन
शोधकर्ताओं ने पाया कि विपरीत समानांतर स्पिन तीन परस्पर असंगत स्पिन घटकों की एक साथ अधिक सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम हैं। वहीं समानांतर स्पिन के साथ ऐसा करना मूलभूत रूप से संभव नहीं है।
यह निष्कर्ष क्वांटम सिद्धांत की बुनियादी समझ को चुनौती देता है। शास्त्रीय भौतिकी में कई गुणों का मापन केवल तकनीकी सीमाओं तक सीमित माना जाता है, लेकिन क्वांटम प्रणालियां अपनी आंतरिक सीमाएं तय करती हैं।
हाइजेनबर्ग और बोहर के सिद्धांतों से जुड़ा अध्ययन
यह अध्ययन हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत और बोहर के पूरकता सिद्धांत जैसे मूलभूत सिद्धांतों से भी जुड़ा हुआ है। शोध के अनुसार, यदि क्वांटम अवस्थाओं को विशेष तरीके से तैयार किया जाए, तो कुछ सीमाओं को अप्रत्याशित ढंग से पार किया जा सकता है।
यह शोध याकिर अहारोनोव और उनके सहयोगियों द्वारा प्रस्तावित प्रसिद्ध क्वांटम पहेली ‘मीन किंग्स प्रॉब्लम’ से भी संबंधित है।
क्वांटम तकनीकों में मिल सकते हैं व्यावहारिक लाभ
शोधकर्ताओं का कहना है कि विपरीत समानांतर कॉन्फ़िगरेशन क्वांटम उपकरणों के अधिक प्रभावी परीक्षण और विश्लेषण में उपयोगी हो सकता है। यह भविष्य में विश्वसनीय क्वांटम तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसके अलावा, यह खोज क्वांटम क्रिप्टोग्राफी प्रोटोकॉल के लिए भी उपयोगी हो सकती है, जहां सीमित क्वांटम संसाधनों से अधिकतम जानकारी प्राप्त करना आवश्यक होता है।
‘विपरीत’ हमेशा कमजोरी नहीं, ताकत भी हो सकता है
अध्ययन यह भी दिखाता है कि क्वांटम भौतिकी में अधिक समरूपता हमेशा अधिक शक्ति का संकेत नहीं होती। कई बार विपरीत अवस्थाएं ऐसी क्षमताएं प्रदान करती हैं, जो समान प्रणालियां नहीं दे पातीं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, क्वांटम दुनिया में विपरीत चीजें केवल आकर्षित ही नहीं करतीं, बल्कि कई बार वे अधिक जानकारी भी उजागर कर सकती हैं। (इनपुट: पीआईबी)


