एक समय में गांव के लोगों के लिए ‘चबैना’ कहलाने वाले मखाने ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नयी उड़ान भरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को पूर्णिया से राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की औपचारिक शुरुआत की। 100 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि के साथ बने इस बोर्ड से मखाना उद्योग को नया एवं बड़ा संबल मिलने की उम्मीद है। बिहार में ही मखाने का 90 प्रतिशत उत्पादन होता है, इसलिए माना जा रहा है कि यह कदम प्रदेश के किसानों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव लाने जा रहा है।
बोर्ड उत्पादन और नई तकनीक के विकास को बढ़ावा देगा, फसल कटाई के बाद प्रबंधन को मज़बूत करेगा, वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग को प्रोत्साहित करेगा तथा मखाने के बाज़ार, निर्यात और ब्रांड डेवलपमेंट को सुगम बनाएगा। इससे बिहार सहित पूरे देश के मखाना किसानों को लाभ मिलेगा।
मखाना कैसे बना ‘सुपरफूड’
लंबे समय तक सिर्फ़ स्थानीय बाज़ारों तक सीमित मखाना आज दुनिया भर में ‘सुपरफूड’ के तौर पर पहचान बना चुका है। इसके औषधीय और पोषण गुण जैसे पाचनकृया में सहायक, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण, हड्डियों की मज़बूती और कम कैलोरी वाला खाद्य पदार्थ होने के कारण इसे हेल्थ और फिटनेस जगत में खास जगह दिलाई है।
पीएम मोदी ने बनाया मखाने को ‘अंतरराष्ट्रीय हीरो’
प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर मखाने का उल्लेख करते हुए इसे सिर्फ़ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारतीय सुपरफूड के रूप में प्रचारित किया। उनकी इस कोशिश से मखाने की वैश्विक मांग बढ़ी और निर्यात के लिए नए रास्ते खुले।
देश और विदेश, दोनों जगह मखाने की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से इसका उत्पादन भी पहले की तुलना में कई गुना बढ़ चुका है। अनुमान है कि फिलहाल करीब 35 हज़ार हेक्टेयर ज़मीन पर मखाने की खेती की जा रही है, जिससे लगभग 5 हज़ार करोड़ रुपये का विशाल बाज़ार तैयार होता है।
किसानों की बदली स्थिति
पहले बिहार के मखाना किसान तकनीक और बाज़ार की कमी के कारण उचित दाम से वंचित रहते थे। उत्पादन सीमित था और बिचौलियों पर निर्भरता अधिक थी। अब राष्ट्रीय मखाना बोर्ड किसानों को प्रशिक्षण, वित्तीय मदद, आधुनिक तकनीक और बेहतर मार्केटिंग उपलब्ध कराएगा। इससे किसानों को सीधे फायदा होगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।
बिहार की पहचान को मिली नई ताक़त
मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, सहरसा, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, किशनगंज और अररिया जैसे ज़िले पहले से ही मखाने के प्रमुख केंद्र हैं। अब बोर्ड के गठन से इन इलाकों की आर्थिक स्थिति को नया आयाम मिलेगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “मखाना बिहार की पहचान और परंपरा का हिस्सा है। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना किसानों और प्रदेश दोनों के लिए ऐतिहासिक अवसर है।”
मखाना अब सिर्फ़ तालाबों में पैदा होने वाला एक अनाज नहीं रहा, बल्कि यह बिहार के किसानों के भविष्य और भारत की कृषि शक्ति का प्रतीक बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की शुरुआत से आने वाले वर्षों में यह उद्योग न केवल बिहार की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि भारत के कृषि निर्यात का अहम स्तंभ भी साबित होगा।
-(लेखिका आशिका सिंह का पत्रकारिता जगत में 18 वर्षों का अनुभव है, वर्तमान में वे प्रसार भारती न्यूज सर्विस के साथ जुड़ी हैं)


