केंद्र सरकार ने कहा है कि नई श्रम संहिताएं देश के निर्यात केंद्रित उद्योगों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आसान नियम और पहले से ज्यादा स्पष्टता प्रदान करती हैं। ये संहिताएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे अनुपालन मानकों को भी पूरा करती हैं। सरकार ने आज रविवार को बताया कि नए सुधारों का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को सशक्त बनाना है, साथ ही श्रमिकों को सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा देना भी सुनिश्चित करना है।
सरकार ने बताया कि नई संहिताओं के तहत श्रमिकों को उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल, समानता और कौशल विकास के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल श्रमिकों के कल्याण में वृद्धि होगी, बल्कि कार्यस्थल पर उनका सम्मान भी बढ़ेगा। मजदूरी की एक समान परिभाषा भी तय की गई है, जो पहले के कानूनों में अलग-अलग परिभाषाओं की वजह से पैदा होने वाली अस्पष्टताओं को समाप्त करेगी। इससे वेतन संबंधी प्रशासन, बोनस, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा योगदान की गणना अब हर जगह समान तरीके से की जा सकेगी।
नई श्रम संहिताओं में राज्यों और केंद्र सरकार को कामकाज के समय की सीमा तय करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। पहले एक तिमाही में 75 घंटे ओवरटाइम की सीमा तय थी, लेकिन अब सरकारें (जहां जैसा लागू हो) उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक इसमें बदलाव कर सकती हैं। इससे निर्यात उद्योगों को व्यावसायिक मांग, विशेष रूप से अधिक ऑर्डर मिलने वाले समय में, कार्य घंटे बढ़ाने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसका सीधा फायदा विकास और रोजगार वृद्धि के रूप में मिलने की उम्मीद है।
नए सुधारों में नियोक्ताओं को भर्ती, मजदूरी और रोजगार की शर्तों में किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव न करने का प्रावधान है, जिसमें ट्रांसजेंडर भी शामिल हैं। सरकार ने कहा कि इससे विशेष रूप से वस्त्र, चमड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे निर्यात आधारित क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को समान अवसर मिलेंगे। महिलाओं को रात्रि शिफ्ट में काम करने की अनुमति देना भी बड़ा सुधार है। इससे महिलाएं हाई-पेमेंट नाइट शिफ्ट का लाभ उठा सकेंगी और वैश्विक समय क्षेत्रों के अनुरूप काम करने वाले उद्योगों में उनकी नौकरी और करियर विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नई संहिताएं श्रमिकों को अपनी समस्याएं, जैसे वेतन या कार्य परिस्थितियों से जुड़ी चिंताएं, बिना किसी डर के सामने रखने का अवसर देती हैं। साथ ही ट्रेड यूनियनों और वार्ता परिषदों को मान्यता देने के प्रावधान सामूहिक सौदेबाजी की प्रक्रिया को मजबूत करेंगे, जिससे उद्योगों में बेहतर सहयोग और सकारात्मक कार्य वातावरण विकसित होगा।-(IANS)


