सरकार सरकार ने बीते शुक्रवार को चार नए लेबर कोड लागू कर दिए, जिनका उद्देश्य देश में कामकाज से जुड़े कानूनों को सरल, आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाना है। ये चार लेबर कोड-कोड ऑन वेजेज (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड (2020), कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) और Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSHWC) Code (2020) कुल 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह लेंगे। इन सुधारों का एक प्रमुख लक्ष्य महिलाओं की नौकरी में भागीदारी बढ़ाना और उनके लिए सुरक्षित, समावेशी और लचीला कार्य वातावरण तैयार करना है।
सरकार के मुताबिक नए लेबर कोड महिलाओं के लिए मातृत्व लाभ, कार्यस्थल सुरक्षा, लैंगिक समानता और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में प्रतिनिधित्व जैसी कई सुविधाओं को मजबूत करते हैं। इससे नौकरी में महिलाओं की स्थिति और अधिकार दोनों सशक्त होंगे। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड (2020) के तहत महिलाओं को अब हर शिकायत निवारण समिति में अनुपातिक प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इससे महिलाएं कार्यस्थल विवादों, उत्पीड़न और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को आसानी और आत्मविश्वास के साथ उठा सकेंगी।
कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) महिलाओं को कम से कम 80 दिन काम करने पर 26 सप्ताह तक का पेड मैटरनिटी लीव देता है, जिसमें से आठ सप्ताह प्रसव से पहले लिए जा सकते हैं। तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को विधिवत गोद लेने वाली महिलाएं और सरोगेसी के माध्यम से मातृत्व पाने वाली महिलाएं 12 सप्ताह की छुट्टी की हकदार होंगी। प्रसव या गोद लेने के बाद, यदि संभव हो, तो महिलाएं नियोक्ता की सहमति से वर्क-फ्रॉम-होम भी कर सकेंगी।
मातृत्व से जुड़े मामलों-जैसे गर्भावस्था, प्रसव, गर्भपात, चिकित्सकीय गर्भसमापन, ट्यूबेक्टॉमी या इनसे जुड़े रोग का प्रमाण अब रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर, ASHA कार्यकर्ता, प्रशिक्षित नर्स या दाई द्वारा भी दिया जा सकेगा। यदि नियोक्ता प्रसव पूर्व या प्रसवोत्तर देखभाल मुफ्त में नहीं देता, तो महिलाओं को 3,500 रुपये का मेडिकल बोनस मिलेगा। प्रसव के बाद माताओं को बच्चे के 15 महीने होने तक प्रतिदिन दो बार स्तनपान अवकाश मिलेगा। 50 या अधिक कर्मचारियों वाली हर संस्था में निर्धारित दूरी पर क्रेच की सुविधा अनिवार्य होगी, जहां महिलाएं दिन में चार बार जा सकेंगी।
नए लेबर कोड महिलाओं को रात की पाली में भी काम करने की अनुमति देते हैं। सुबह 6 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद- बशर्ते सुरक्षा, परिवहन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे कई ऐसे क्षेत्रों में भी महिला रोजगार बढ़ेगा जो पहले सीमित थे। वहीं कोड ऑन वेजेज भर्ती, वेतन और काम की शर्तों में लैंगिक भेदभाव पर रोक लगाता है और समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार देता है। इसके अलावा केंद्र और राज्य स्तरीय Advisory Boards में एक-तिहाई सदस्य महिलाएं होंगी ताकि वे न्यूनतम वेतन, रोजगार के अवसर और नीतिगत निर्णयों में अधिक योगदान दे सकें।
इन सभी सुधारों का उद्देश्य महिलाओं के लिए नौकरी के वातावरण को सुरक्षित, न्यायसंगत, लचीला और अवसरों से भरा बनाना है। नए लेबर कोड कार्यस्थल पर समानता, मातृत्व सुरक्षा,प्रतिनिधित्व और बच्चों की देखभाल से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करते हैं, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और वे देश के कार्यबल में अपनी भूमिका को और मजबूती से निभा सकेंगी।


