भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में आज रविवार को एक खास प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें तीन अलग-अलग शैली और क्षेत्रों की फिल्मों-‘Nilgiris : A Shared Wilderness, Mukkam Post Bombilwadi’ और ‘Sikaar’ की टीमों ने हिस्सा लिया। इस सत्र ने फिल्मकारों को अपने अनुभव, क्रिएटिव सोच और फिल्मों की चुनौतियों पर खुलकर बात करने का मंच दिया।
सत्र की शुरुआत असमिया फिल्म ‘Sikaar’से हुई। इसके निर्देशक देबंगकर बोर्गोहेनने हाल ही में दिवंगत हुए संगीतकार जुबिन गर्ग को भावनात्मक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि वे शुरुआत में जुबिन को केवल संगीत के लिए संपर्क करने गए थे, लेकिन पूरी कहानी सुनकर जुबिन ने फिल्म में अभिनय करने की इच्छा जताई। यह फिल्म उनके जीवनकाल में रिलीज होने वाली अंतिम फिल्म है। बोर्गोहेन ने बताया कि यह पहली असमिया फिल्म है, जिसकी लगभग 70% शूटिंग लंदन में हुई। टीम के अधिकांश सदस्य विदेश नहीं जा सके, इसलिए उन्होंने कई दृश्य गुवाहाटी से रिमोटली डायरेक्ट किए। उन्होंने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म्स पहुंच बढ़ाते हैं, लेकिन क्षेत्रीय फिल्मों को अभी भी उचित दृश्यता नहीं मिलती।
इसके बाद ‘Nilgiris: A Shared Wilderness’ की टीम ने वन्यजीवन और प्रकृति की अनोखी दुनिया के बारे में बताया। एसोसिएट प्रोड्यूसर आदर्श एन. सी. ने कहा कि फिल्म को 8K और 12K में शूट करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने कहा “फिल्म के असली सितारे वन्यजीव हैं। वे समय देखकर नहीं आते, और यहां कोई रीटेक नहीं होता,”। उन्होंने बताया कि कई बार एक शॉट कैप्चर करने में महीनों लग गए। टीम के सदस्य श्री हर्षा ने बताया कि वन्यजीवों की अनिश्चित गतिविधियों के कारण रियल-टाइम रिसर्च जरूरी हो जाता है। टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि यह डॉक्यूमेंट्री पूरी तरह भारतीय प्रतिभा और टेक्नोलॉजी से बनी है। उन्होंने कहा कि OTT से बातचीत जारी है, लेकिन यह फिल्म बड़े पर्दे पर देखने के लिए ही बनाई गई है।
तीसरी फिल्म ‘Mukkam Post Bombilwadi’ की टीम ने ऐतिहासिक हास्य का रंग भरा। निर्देशक परेश मोकाशी और निर्माता भरत शितोले ने बताया कि यह फिल्म उनकी मशहूर स्टेज प्ले पर आधारित है और 1942 के दौर में सेट है, जब एक तटीय महाराष्ट्रियन गांव स्वतंत्रता आंदोलन और द्वितीय विश्व युद्ध की उथल-पुथल के बीच फंस जाता है। परेश ने कहा कि कॉमेडी गंभीर मुद्दों को भी हल्के और प्रभावी तरीके से सामने ला सकती है। OTT पर क्षेत्रीय फिल्मों की पहचान को लेकर उन्होंने कहा कि स्थानीय दर्शकों को अपने क्षेत्र की फिल्मों का समर्थन करना होगा, तभी वे वैश्विक स्तर पर मजबूती पकड़ेंगी। शितोले ने सहमति जताते हुए कहा कि OTT ने अवसर बढ़ाए हैं, लेकिन क्षेत्रीय फिल्मों को अभी भी मुख्य प्लेटफॉर्म पर बेहतर दृश्यता की जरूरत है।


