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‘कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती’: पोखरण परीक्षणों को याद कर बोले प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मई 1998 में पोखरण-II परमाणु परीक्षण की ऐतिहासिक उपलब्धि को याद करते हुए इसे भारत के संकल्प और आत्मविश्वास का निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि 11 मई 1998 को हुए परमाणु परीक्षणों के बाद पूरी दुनिया ने भारत पर दबाव बनाया था, लेकिन भारत ने यह साबित कर दिया कि कोई भी ताकत उसे झुका नहीं सकती।

संस्कृत श्लोक के जरिए दिया संदेश

पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में शक्ति और क्षमता के सामंजस्य को रेखांकित करने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया।

“एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता । न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”

इस श्लोक का आशय है कि शक्ति और शक्तिमान एक-दूसरे के पूरक हैं। जैसे शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं, वैसे ही शिव के बिना शक्ति का अस्तित्व नहीं है।

एक्स पोस्ट में कही यह बात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा—“1998 में आज ही के दिन भारत ने जो परमाणु परीक्षण किए थे, उनसे दुनिया को पता चला कि हमारे देश की इच्छाशक्ति कितनी अटल है! 11 मई के परीक्षणों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत पर काफी दबाव बनाया गया, लेकिन देश ने यह साबित कर दिया कि कोई भी ताकत उसे अपने इरादों से झुका नहीं सकती।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षणों ने वैश्विक समुदाय के सामने भारत की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और सामरिक मजबूती का स्पष्ट संदेश दिया था। (इनपुट-पीआईबी)

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