एनटीपीसी की पकरी-बरवाडीह खदान को लगातार दूसरी बार फाइव स्टार रेटिंग, ओपन कास्ट खदानों में देश में रही अव्वल

देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही एनटीपीसी की झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित पकरी-बरवाडीह ओपन कास्ट कोयला खदान को लगातार दूसरे वर्ष फाइव स्टार रेटिंग मिली है। सुरक्षित खनन, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग के आधार पर कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक कार्यालय (सीसीओ) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए यह सम्मान प्रदान किया है।

लगातार दूसरे वर्ष देश में शीर्ष स्थान

एनटीपीसी की तीन खदानों—झारखंड की पकरी-बरवाडीह, ओडिशा की दुलंगा और छत्तीसगढ़ की तलाईपल्ली—को इस वर्ष फाइव स्टार रेटिंग मिली है। इनमें पकरी-बरवाडीह खदान ने लगातार दूसरे वर्ष देश की ओपन कास्ट खदानों में शीर्ष स्थान हासिल कर अपनी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली का परिचय दिया है।

देश की ऊर्जा जरूरतों में अहम योगदान

हजारीबाग स्थित पकरी-बरवाडीह खदान से निकला कोयला देश के कई ताप विद्युत संयंत्रों तक पहुंचता है और करोड़ों लोगों के घरों को रोशन करने में योगदान देता है। एनटीपीसी के अपर महाप्रबंधक (खनन) चंद्रशेखर ने बताया कि एनटीपीसी लगभग 90 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के साथ देश की करीब 24% बिजली जरूरत पूरी करती है। उन्होंने कहा कि देश का हर चौथा बल्ब किसी न किसी रूप में एनटीपीसी की ऊर्जा से रोशन होता है और पकरी-बरवाडीह जैसी खदानें ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

सुरक्षित और जिम्मेदार खनन का मिला सम्मान

चंद्रशेखर ने बताया कि फाइव स्टार रेटिंग सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और जिम्मेदार खनन के लिए दी गई है। यह उपलब्धि खदान में सुरक्षा मानकों, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग का प्रमाण है।

त्रिवेणी सैनिक माइनिंग लिमिटेड कर रही है संचालन

पकरी-बरवाडीह में कोयला उत्खनन का कार्य त्रिवेणी सैनिक माइनिंग लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। कंपनी के सीईओ संजय कुमार खटोर ने कहा कि फाइव स्टार रेटिंग केवल उत्पादन का नहीं, बल्कि सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सतत खनन, तकनीकी प्रबंधन और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का भी प्रमाण है।

पर्यावरण संरक्षण को दी जा रही प्राथमिकता

कोयला नियंत्रक कार्यालय हर वर्ष देशभर की कोयला और लिग्नाइट खदानों का मूल्यांकन करता है। लगातार दूसरी बार फाइव स्टार रेटिंग मिलना न केवल एनटीपीसी, बल्कि हजारीबाग और झारखंड के लिए भी गौरव का विषय है। परियोजना में खनन के बाद भूमि पुनर्वास, हरित क्षेत्र का विकास, जल संरक्षण और धूल नियंत्रण जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके कारण यह परियोजना जिम्मेदार और टिकाऊ खनन के मॉडल के रूप में भी पहचान बना रही है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में पकरी-बरवाडीह खदान की लगातार दूसरी फाइव स्टार रेटिंग यह दर्शाती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। बेहतर तकनीक, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार प्रबंधन के बल पर यह परियोजना भारतीय खनन क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है।