ऑपरेशन सिंदूर : पुलवामा से पहलगाम तक, आतंक को मुंहतोड़ जवाब देता नया भारत

एक बार फिर आसमान में गरजते भारत के लड़ाकू विमानों ने गवाही दे दी है कि भारत चुप बैठने वाला नहीं है। भारत सहनशील है लेकिन कमजोर नहीं। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ आज एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने दुनिया को दिखा दिया कि नया भारत अब सहेगा नहीं बल्कि मुंहतोड़ जवाब देगा, वो भी दुश्मन के घर में घुसकर। कुछ दिन पहले जो त्रासदी पाहलगाम में घटी, उसने हर भारतीय के दिल को चीर दिया। पहलगाम में मासूम नागरिकों, निर्दोष सैलानियों की हत्या केवल खून नहीं था जो बहा, ये भारत की आत्मा पर हमला था इसी का जवाब है ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जिसमें आतंक के 9 ठिकाने तबाह हो गए हैं।

सबक नहीं सीखा पाकिस्तान

पहलगाम से पहले 14 फरवरी 2019 वो दिन जब पूरा देश थम गया। पुलवामा में आत्मघाती हमले में निर्दोषों की जान गई। यह एक सीधा हमला था भारत की आत्मा पर। देश शोक में डूब गया, लेकिन उस शोक में एक चिंगारी भी सुलग रही थी ‘अब बहुत हुआ!’ और फिर 26 फरवरी 2019 को भारत ने इतिहास रच दिया था। वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। यह सिर्फ बमबारी नहीं थी यह ‘नए भारत का जवाब’ था, जो अब आतंक को सरहद के भीतर नहीं सहता, बल्कि उसके घर में घुसकर सजा देता है। पाकिस्तान ने इससे भी सबक नहीं लिया और अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आया लेकिन भारत ने एक बार फिर आतंक के सफाए का बीड़ा उठा लिया है।

पहलगाम में फिर से छलनी हुआ विश्वास

वक्त बदला, लेकिन पाकिस्तान पोषित आतंकवाद की मानसिकता नहीं बदली। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादी पहलगाम में एक और कायराना हमला हुआ। इस बार टारगेट थे निहत्थे पर्यटक। वे लोग जो प्रकृति की गोद में सुकून की तलाश में आए थे। 26 लोगों की दर्दनाक हत्या जैसे हमले ने एक बार फिर हमारे ज़ख्मों को कुरेद दिया। इस बार अमरनाथ यात्रा की तैयारियों से पहले ये हमला हुआ। पाकिस्तान की ये नापाक हरकत दुनिया के लिए एक स्पष्ट संदेश थी कि आतंक फिर से सिर उठाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इस बार भारत सिर्फ मातम नहीं मना रहा। इस बार भारत फिर से करारा जवाब दे रहा है।

बालाकोट जैसी चेतावनी

आज जब देश पहलगाम की घटना से उबरने की कोशिश कर रहा है, भारत ने एक बार फिर वो संदेश दिया है जो 2019 में बालाकोट से दिया था। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि पहले से भी बड़ा जवाब देने की तैयारी है इस बार। अब भारत का धैर्य उसकी ताकत है, और जवाब उसकी नीति। खुफिया सूत्रों के अनुसार, सीमा पार चल रहे आतंकी शिविरों पर नजर रखी जा रही है। देश के उच्चस्तरीय सुरक्षा बल एक्शन में हैं। आतंक के आकाओं के ठिकानों पर घर में घुस कर तबाही मचाकर भारत ने ये संदेश दे दिया है कि अब ‘ना खून बहाने वाले माफ होंगे, ना साजिश रचने वाले’।

नर्म दिल, लेकिन फौलादी इरादे

2016 का उरी हमला हो, 2019 का पुलवामा या 2025 का पहलगाम का बदला भारत अब हर बार ये दिखा रहा है कि हमला करने वालों को हम इतिहास से मिटा देंगे। ये वही भारत है जो सर्जिकल स्ट्राइक करता है। ये वही भारत है जो बालाकोट में 80 किलो बम गिराता है। आज का भारत कूटनीति में सज्जन है तो रणनीति में कुशल। युद्ध में निर्णायक बन चुका भारत अब अपने आंसू छिपाकर नहीं रोता, वो उन्हें हथियार बनाकर दुश्मन पर बरसाता है।

बलिदानों को नहीं भूला जा सकता

चाहे पुलवामा के शहीद हों या पहलगाम में मारे गए निर्दोष लोग भारत उनके खून की कीमत जानता है। देश का हर नागरिक, हर जवान और मौजूदा नेतृत्व ये संकल्प ले चुका है कि अब कोई मां अपना लाल नहीं खोएगी और किसी का सिंदूर उजाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह देश अब माफ नहीं करेगा आतंक के खिलाफ कड़ा वार करेगा।

विश्व मंच पर भारत की हुंकार

आज अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी भारत के इस साहसी कदम का समर्थन कर रहा है। अमेरिका, फ्रांस, जापान जैसे कई देश भारत के साथ खड़े हैं क्योंकि उन्हें भी समझ आ गया है कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है यह मानवता का शत्रु है और भारत उसका सबसे मुखर और निर्णायक विरोधी बनकर उभरा है। भारत का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई का कोड नहीं, एक प्रतीक है आतंक के सफाए का। पाकिस्तान की धरती पर स्थित आतंकी अड्डे, जो अब तक दहशत का बीज बोते थे आज मिट्टी में मिल गए। दुनिया जानती है कि आज की कार्रवाई केवल एक पुलवामा का उत्तर नहीं है यह एक वैचारिक युद्ध का उत्तर है। वह विचारधारा जो मासूमों की हत्या को ‘जिहाद’ कहती है, जो शांति की धरती को खून से रंगने में विश्वास रखती है आज उसी मानसिकता पर करारा तमाचा मारा गया है।

चुप्पी नहीं, ललकार है ये

2019 में बालाकोट से जो चेतावनी दी गई थी, 2025 में भी वही स्वर फिर से गूंजा है। यह एक नया भारत है। बेशक जो युद्ध नहीं चाहता, लेकिन डरता भी नहीं। जो शांति का पक्षधर है, लेकिन बेबस नहीं। जो इतिहास बदलना जानता है और दुश्मन की नींद उड़ाना भी। दुश्मन को अब ये समझ लेना होगा कि भारत की चुप्पी उसकी कमजोरी नहीं, उसकी चेतावनी थी जिसका अंजाम आज आतंक को पोषित करने वालों के सामने है। भारत ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि सीमा रेखा अब डर की दीवार नहीं, हिम्मत की रेखा है और भारत जब एक बार निर्णय कर लेता है, तो पीछे मुड़कर नहीं देखता।

-(लेखक अमित शर्मा एक अनुभवी पत्रकार हैं ; राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राजनीतिक मुद्दों पर गहरी पकड़ है)

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