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ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस हुआ पूरा, 27 देशों के 276 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2’ आज गुरुवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक विशेष अभ्यास था। इस नौसैनिक अभ्यास में 27 देशों के 276 प्रतिभागियों, 76 प्रशिक्षकों एवं विषय विशेषज्ञों तथा चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भाग लिया। इन चार दिनों में विभिन्न देशों के प्रतिभागियों को समुद्री सुरक्षा, कानूनी और ऑपरेशनल विषयों पर व्यापक प्रशिक्षण दिया गया।

इस प्रशिक्षण में समुद्री क्षेत्र जागरूकता, सूचना साझा करना, समुद्री कानून, मादक पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी रोकने के उपाय, बल सुरक्षा, समुद्र में असममित खतरों से निपटना, मानव रहित समुद्री प्रणालियां तथा समुद्री ऑपरेशन संबंधी अभ्यास शामिल रहे। यह अभ्यास 20 से 23 जुलाई तक भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाले संयुक्त कार्यबल 154 और दक्षिणी नौसैनिक कमान के तत्वावधान में आयोजित किया गया।

इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना, विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल मजबूत करना और साझा चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित करना था। यह पूरा आयोजन भारतीय नौसेना की मेजबानी में दक्षिणी नौसैनिक कमान, कोच्चि में आयोजित किया गया। अभ्यास का उद्घाटन 20 जुलाई को दक्षिणी नौसैनिक कमान मुख्यालय के प्रशिक्षण प्रमुख रियर एडमिरल दीपक सिंघल ने किया। इस अवसर पर संयुक्त समुद्री बलों के उप कमांडर कमोडोर डैन थॉमस, वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारी तथा सहभागी देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

23 जुलाई को आयोजित समापन समारोह में संयुक्त कार्यबल 154 के कमांडर कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षकों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। भारतीय नौसेना के विशेषज्ञों के अलावा हिंद महासागर सूचना समन्वय केंद्र, संयुक्त समुद्री बलों के संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र तथा संयुक्त राष्ट्र के मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून संस्थान के विशेषज्ञों ने भी प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया।

नौसेना के मुताबिक, प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया, बल्कि क्षति नियंत्रण, आग बुझाने की तकनीक, समुद्री संचार, समुद्र में जीवित रहने की तकनीक, जहाज पर चढ़ने की प्रक्रिया, तथा भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर समुद्री अभ्यास भी कराया गया। इन व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से विभिन्न देशों के प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्हें सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को समझने तथा समुद्री अभियानों में समन्वय बढ़ाने का अवसर मिला। चार दिनों तक चले इस कार्यक्रम के दौरान कुल 3,800 प्रशिक्षण मानव-घंटे पूरे किए गए।

अभ्यास ने विभिन्न देशों की नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के बीच परिचालन समन्वय, आपसी विश्वास और पेशेवर संपर्कों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 के माध्यम से भारतीय नौसेना ने अपने आधुनिक प्रशिक्षण ढांचे, अत्याधुनिक सिमुलेटर, उन्नत प्रशिक्षण पद्धतियों और पेशेवर विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया है।

इस अभ्यास की सफलता ने भारतीय नौसेना और संयुक्त समुद्री बलों के बीच साझेदारी को और मजबूत किया है। साथ ही, इस आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाला संयुक्त कार्यबल 154 क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। (इनपुट-आईएएनएस)