परंपरागत कृषि विकास योजना से भारत में जैविक खेती को नई ऊंचाई, 25 लाख से अधिक किसानों को मिला लाभ

केंद्र सरकार की परंपरागत कृषि विकास योजना 2015 में राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के तहत शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य किसानों को क्लस्टर आधारित जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन स्थापित हो और किसानों की आमदनी बढ़े। योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को कम लागत वाली रासायनिक मुक्त तकनीकों के जरिए खेती करने का अवसर मिलता है और उन्हें बाजार से जोड़कर उनकी उत्पाद की कीमत बढ़ाने में मदद मिलती है।

अब तक, PKVY के तहत लगभग 15 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती की जा चुकी है। इस दौरान 52,289 क्लस्टर बनाए गए और 25.30 लाख किसानों को लाभ मिला है। 2024 दिसंबर तक ‘जैविक खेती पोर्टल’ पर 6.23 लाख किसान, 19,016 स्थानीय समूह, 89 इनपुट आपूर्तिकर्ता और 8,676 खरीदार पंजीकृत हैं।

किसानों को इस योजना के तहत तीन साल के लिए प्रति हेक्टेयर 31,500 रुपए सहायता दी जाती है। यह सहायता जैविक इनपुट्स, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, प्रमाणीकरण, विपणन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर खर्च की जाती है। PKVY किसानों को सीधे डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए अपने उत्पाद बेचने और बाजार में अपनी पहचान बनाने में भी मदद करता है।

योजना को जमीन पर लागू करने के लिए किसान अपने क्षेत्रीय परिषदों से संपर्क करते हैं। क्षेत्रीय परिषदें आवेदन संकलित कर वार्षिक कार्य योजना बनाती हैं और इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजती हैं। मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय सरकार राज्य सरकार को धन आवंटित करती है, जो इसे सीधे DBT के माध्यम से किसानों तक पहुंचाती है।

PKVY दो प्रकार का प्रमाणीकरण प्रदान करता है: अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए NPOP और घरेलू बाजार के लिए पीजीएस-इंडिया (Participatory Guarantee System) वहीं 2020-21 में लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन शुरू किया गया, जो उन क्षेत्रों में जल्दी प्रमाणीकरण दिलाने में मदद करता है जहां रासायनिक खेती कभी नहीं हुई, जिससे किसानों की आमदनी जल्दी बढ़ती है।

वहीं पूर्वोत्तर भारत में PKVY का विशेष प्रभाव देखा गया है। असम में 4,400 हेक्टेयर में जैविक खेती कर 9,740 किसानों को लाभ मिला। सिक्किम में 63,000 हेक्टेयर में LAC के तहत जैविक खेती की गई, जिससे सिक्किम दुनिया का एकमात्र पूर्णत: जैविक राज्य बन गया। अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा और मेघालय ने मिलकर 4,140 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया। वित्तीय सहायता के रूप में असम को लगभग 3,013 करोड़ रुपए, सिक्किम को 1,849 करोड़ रुपए और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों को मिलाकर लगभग ₹2,337 करोड़ मिले हैं।

PKVY योजना ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई है, बल्कि भारतीय जैविक उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विश्वसनीय बनाया है और पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान दिया है।-(PIB)

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