केंद्र सरकार की स्फूर्ति योजना (एसएफयूआरटीआई) के माध्यम से देशभर में 3 लाख से अधिक पारंपरिक कारीगरों को लाभ मिला है। वर्ष 2015-16 से अब तक इस योजना के तहत विभिन्न पारंपरिक क्षेत्रों में कुल 513 क्लस्टरों को मंजूरी दी गई है, जिनसे लगभग 3.03 लाख कारीगरों को लाभान्वित करने का प्रस्ताव है।
क्लस्टरों के माध्यम से बुनियादी सुविधाओं का विकास
योजना के तहत स्वीकृत क्लस्टरों में सामान्य सुविधा केंद्र (सीएफसी) का निर्माण, संयंत्र और मशीनरी की खरीद तथा स्थापना जैसी गतिविधियां की जा रही हैं। इसके साथ ही प्रत्यक्ष कार्रवाई के तहत कच्चे माल की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।
प्रशिक्षण और विपणन पर विशेष जोर
कारीगरों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, एक्सपोजर विज़िट और खरीदार-विक्रेता बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा सूचीबद्ध तकनीकी एजेंसियां ई-कॉमर्स पर विशेष ध्यान देते हुए समूहों को विपणन रणनीति तैयार करने और लागू करने में सहायता करती हैं।
ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग का लाभ
तकनीकी एजेंसियां ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के उपयोग, व्यवसाय विकास रणनीतियों की योजना बनाने, नए मीडिया मार्केटिंग और प्रचार गतिविधियों के माध्यम से उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में कारीगरों की मदद कर रही हैं।
कारीगरों की आय में हुआ इजाफा
मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, कार्यात्मक स्फूर्ति क्लस्टरों में कारीगरों की आय में आम तौर पर 15-18% तक वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि मूल्यवर्धन, उत्पाद विविधीकरण और घरेलू तथा निर्यात बाजारों तक बेहतर पहुंच के कारण संभव हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा रोजगार
सामान्य सुविधा केंद्रों में नियमित वेतन आधारित कार्य के माध्यम से रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिर आजीविका को बढ़ावा मिला है।
राज्यसभा में दी गई जानकारी
यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के राज्य मंत्री शोभा करंदलजे ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। (इनपुट: पीआईबी)


