कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की उर्वरता संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियां जारी हैं। 4 जून 2026 तक इस अभियान से देशभर में 9.42 लाख से अधिक किसान विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जुड़ चुके हैं।
17,834 जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल हुए लाखों किसान
अभियान के अंतर्गत अब तक देशभर में 17,834 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें लगभग 6.983 लाख किसानों ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा संरक्षण और टिकाऊ खेती के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों से बढ़ रही वैज्ञानिक खेती की समझ
किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए 3,698 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 1,57,438 प्रतिभागियों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
8,850 प्रदर्शनों के जरिए दिया जा रहा व्यवहारिक प्रशिक्षण
व्यावहारिक सीख को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8,850 डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किए गए। इनमें जैविक एवं वैकल्पिक पोषक स्रोतों के उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों को खेत स्तर पर अपनाने योग्य उपायों की जानकारी मिल सके।
पंचायत प्रतिनिधियों और डीलरों की भी सक्रिय भागीदारी
अभियान के तहत पंचायत स्तर तक जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। अब तक 5,237 पंच, सरपंच और जिला परिषद सदस्यों को इस अभियान से जोड़ा गया है। वहीं, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 9,609 इनपुट डीलरों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
FPO, SHG और किसान समूहों को भी जोड़ा गया
किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान हित समूह (FIG) भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं। अब तक 8,383 किसान-सदस्यों ने इन कार्यक्रमों में भाग लेकर वैज्ञानिक पोषक प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़ी जानकारी प्राप्त की है।
जनसंपर्क और मीडिया के माध्यम से बढ़ी अभियान की पहुंच
अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए देशभर में 60,477 स्थानों पर बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इसके अलावा 1,027 रेडियो और सामुदायिक रेडियो वार्ताओं तथा 240 टीवी एवं डिजिटल मीडिया कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों और आमजन तक अभियान का संदेश पहुंचाया गया है।
सोशल मीडिया से 3.5 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा संदेश
डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग से अभियान की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों के जरिए अब तक लगभग 3.505 करोड़ लोगों तक अभियान का संदेश पहुंचाया जा चुका है।
4 जून तक 600 कार्यक्रमों में 32 हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल
केवल 4 जून 2026 तक अभियान के तहत 600 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 32,021 प्रतिभागियों ने भाग लिया। मंत्रालय का उद्देश्य किसानों को मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के जरिए मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है।
स्वस्थ कृषि भूमि संरक्षण पर विशेष जोर
अभियान का मुख्य उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना, मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ एवं उत्पादक कृषि भूमि का संरक्षण सुनिश्चित करना है। मंत्रालय का मानना है कि वैज्ञानिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियां ही दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला हैं। (इनपुट: पीआईबी)


