ग्लाव झील बनी अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट, देश में रामसर स्थलों की संख्या 101 पहुंची

अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील को भारत का 101वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को इसकी घोषणा करते हुए इसे आर्द्रभूमि संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा तथा सतत आजीविका की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ग्लाव झील का रामसर स्थल के रूप में चयन अरुणाचल प्रदेश के लिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि यह राज्य का पहला रामसर स्थल है।

2014 में 26 से बढ़कर 101 हुए रामसर स्थल

भूपेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रामसर स्थलों के नेटवर्क के विस्तार को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश में केवल 26 रामसर स्थल थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 101 हो गई है। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

आर्द्रभूमि और स्थानीय समुदायों के संरक्षण पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रत्येक नए रामसर स्थल के जुड़ने से प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के साथ-साथ इन पर निर्भर समुदायों के हितों की रक्षा का संकल्प मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि रामसर स्थलों का विस्तार प्रकृति संरक्षण के साथ जल और जलवायु सुरक्षा तथा सतत आजीविका को भी बढ़ावा देता है।

पूर्वी हिमालय में जैव विविधता का प्रमुख केंद्र

कमलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत स्थित ग्लाव झील पूर्वी हिमालय में एक निर्मल मीठे पानी की झील है। बारहमासी पहाड़ी धाराओं से पोषित यह झील घनी वनस्पतियों से घिरी हुई है, जिसके कारण यहां समृद्ध जैव विविधता देखने को मिलती है।

150 से अधिक वृक्ष और 49 ऑर्किड प्रजातियां

ग्लाव झील और इसके आसपास के क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियां तथा 49 ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं। यह जैव विविधता इस आर्द्रभूमि के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करती है और इसके संरक्षण की आवश्यकता को और महत्वपूर्ण बनाती है।

आर्द्रभूमि संरक्षण को मिलेगी नई गति

ग्लाव झील के रामसर स्थल के रूप में शामिल होने से अरुणाचल प्रदेश की आर्द्रभूमि संरक्षण क्षमता को नई पहचान मिली है। इसके साथ भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों का नेटवर्क 101 स्थलों तक पहुंच गया है, जो देश के प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। (इनपुट: पीआईबी)