सरकार ने मंगलवार को बायोमास और अपशिष्ट पदार्थों से हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों को विकसित करने हेतु पायलट परियोजनाओं के तहत 100 करोड़ रुपये के प्रस्तावों की घोषणा की।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन यात्रा को गति दे रहा है, जिससे रोजगार सृजन, निवेश वृद्धि और भारत को वैश्विक ‘ग्रीन हाइड्रोजन हब’ बनाने में मदद मिल रही है।
उन्होंने बताया कि 2023 में 19,744 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू किया गया यह मिशन कठिन-से-डीकार्बोनाइज़ सेक्टर्स के लिए वैश्विक समाधान प्रदान कर रहा है। जोशी ने कहा, “ग्रीन हाइड्रोजन नई सभ्यता का ईंधन बनेगा और दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त करेगा।”
मंत्री ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) का आधिकारिक लोगो भी लॉन्च किया, जिसे देशभर से प्राप्त 2,500 प्रविष्टियों में से चुना गया है। उन्होंने बताया कि SIGHT कार्यक्रम के तहत 3,000 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और 8.62 लाख मीट्रिक टन वार्षिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहन दिया गया है।
भारत में अब विश्व का सबसे कम ग्रीन अमोनिया मूल्य — ₹49.75 प्रति किलोग्राम — दर्ज किया गया है। इसके अलावा, ग्रीन स्टील, हाइड्रोजन ईंधन वाले वाहनों और बंकरिंग सुविधाओं के लिए 375 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।
संतोष कुमार सारंगी, सचिव, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि भारत की नॉन-फॉसिल इंस्टॉल्ड क्षमता 250 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, जिसमें 130 GW सोलर और 50 GW विंड एनर्जी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” विज़न के तहत भारत 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।


