केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह से मुलाकात कर देश के मत्स्य निर्यात को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने मछुआरों की आय बढ़ाने और मत्स्य क्षेत्र में नए अवसर विकसित करने को लेकर भी विचार-विमर्श किया।
सतत विकास और नवाचार पर जोर
बैठक के बाद पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मत्स्य क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने और नवाचार को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र को मजबूत बनाने और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
समुद्री खाद्य निर्यात में दर्ज हुई मजबूत वृद्धि
इससे पहले ललन सिंह ने कहा था कि भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों में बेहतर प्रदर्शन से निर्यात को बढ़ावा मिला है। उन्होंने बाजार और उत्पादों में विविधता बढ़ाने के साथ-साथ कड़े नियामकीय अनुपालन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसमें एंटीबायोटिक प्रतिबंधों का पालन और ट्रेसबिलिटी सिस्टम को मजबूत करना शामिल है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा समुद्री खाद्य निर्यात
समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात रिकॉर्ड 72,325.82 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इस दौरान कुल निर्यात मात्रा 19.32 लाख मीट्रिक टन रही।
फ्रोजन झींगा बना सबसे बड़ा आधार
समुद्री खाद्य निर्यात में फ्रोजन झींगा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना रहा। इससे 47,973.13 करोड़ रुपए की कमाई हुई, जो कुल निर्यात आय का दो-तिहाई से अधिक है। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, झींगा निर्यात की मात्रा में 4.6 % और मूल्य में 6.35 % की वृद्धि दर्ज की गई।
अमेरिका में गिरावट, अन्य बाजारों में बढ़ी मांग
सरकारी बयान के अनुसार, अमेरिका भारत के समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहा, जहां कुल आयात 2.32 अरब डॉलर रहा। हालांकि, अमेरिका को होने वाले निर्यात में मात्रा के लिहाज से 19.8 % और मूल्य के लिहाज से 14.5 % की गिरावट दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण पारस्परिक शुल्कों का प्रभाव बताया गया।
चीन और अन्य बाजारों से मिली मजबूती
अमेरिका में गिरावट के बावजूद चीन, यूरोपीय संघ और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में मजबूत मांग से निर्यात को सहारा मिला। भारत के दूसरे सबसे बड़े निर्यात गंतव्य चीन को निर्यात मूल्य में 22.7 % और मात्रा में 20.1 % की वृद्धि दर्ज की गई। (इनपुट: आईएएनएस)


