भारत में मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को नई रफ्तार देने की तैयारी, पीयूष गोयल ने रखा 5 सूत्रीय प्लान

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के मेडिकल वैल्यू टूरिज्म इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए पांच सूत्रीय कार्ययोजना पेश की है। इसका उद्देश्य भारत को उच्च गुणवत्ता वाले अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और वेलनेस सेवाओं के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।

नई दिल्ली में आयोजित ‘Bharat Health Global Expo 2026’ के तहत ‘Sanjeevani 2026’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं देने की क्षमता और संसाधन मौजूद हैं।

देखभाल करने वाले कर्मचारियों को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन

गोयल ने कहा कि पहला कदम ऐसे caregivers को प्रशिक्षित और प्रमाणित करना होना चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मरीजों की देखभाल कर सकें। इसके लिए कुशल और प्रशिक्षित workforce तैयार करने पर जोर दिया जाना चाहिए।

‘Heal in India’ से ज्यादा अस्पतालों को जोड़ने पर जोर

दूसरे बिंदु के तहत उन्होंने अधिक से अधिक अस्पतालों को ‘Heal in India’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने और इलाज के पैकेज की स्पष्ट एवं पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही।

उन्होंने कहा कि अस्पतालों को नैतिक तरीके से काम करना चाहिए और मरीजों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं होनी चाहिए। एक गलत कदम से भारत की प्रतिष्ठा, कारोबार और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है।

इंश्योरेंस और हेल्थ-टेक कंपनियां बनाएं बेहतर प्लेटफॉर्म

तीसरे बिंदु के तहत गोयल ने बीमा कंपनियों और हेल्थ-टेक कंपनियों से ऐसे उत्पाद और प्लेटफॉर्म विकसित करने का आग्रह किया, जिससे मरीजों की पूरी यात्रा आसान हो सके।

उन्होंने समय पर reimbursement और ज्यादा से ज्यादा cashless payment की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म की शुरुआती प्रक्रिया में teleconsultation और telemedicine का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया।

दुनिया में भारत की मेडिकल सुविधाओं का प्रचार

चौथे बिंदु में उन्होंने दुनिया के अलग-अलग देशों में exhibitions और presentations आयोजित करने, facilitators बनाने और वैश्विक स्तर पर अस्पतालों के साथ partnerships करने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि विदेश से आने वाले मरीजों का इलाज केवल NABH-enabled, verified और panelled hospitals में होना चाहिए। गोयल ने कहा कि National Accreditation Board for Hospitals and Healthcare Providers (NABH) को गुणवत्ता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना होगा और इसमें किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

छोटे शहरों तक मेडिकल टूरिज्म का विस्तार

पांचवें बिंदु के तहत गोयल ने राज्यों से अस्पतालों और wellness centres में गुणवत्ता पर ध्यान देने, उनका नेटवर्क बढ़ाने और अच्छी सुविधाओं को वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे Tier-2 और Tier-3 शहरों तक पहुंचाने से रोजगार और नए अवसर पैदा होंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होगा और भारतीय मरीजों के लिए भी स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा।

सालाना एक करोड़ मरीजों का लक्ष्य

गोयल ने कहा कि पिछले सात वर्षों में भारत के मेडिकल वैल्यू टूरिज्म इकोसिस्टम से करीब 35 लाख मरीजों को लाभ मिला है। अब भारत को हर साल एक करोड़ मरीजों को मेडिकल सेवाएं देने का लक्ष्य रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत के पास क्षमता, विशेषज्ञ डॉक्टर, तकनीक और जरूरी इकोसिस्टम मौजूद है।

भारत से बड़ी संख्या में स्वास्थ्य पेशेवर चाहते हैं दूसरे देश

गोयल ने कहा कि जिन देशों के साथ भारत Free Trade Agreements (FTAs) और व्यापारिक बातचीत कर रहा है, वे बड़ी संख्या में भारत से उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं, डॉक्टर, तकनीशियन, नर्स और caregivers चाहते हैं।

उन्होंने अलग-अलग देशों से आने वाले मरीजों के लिए interpreters का एक pool बनाने का भी सुझाव दिया। इससे मरीजों को ज्यादा भरोसा मिलेगा और उनकी भाषा में मेडिकल सिस्टम के साथ संवाद आसान होगा।

भारतीय और विदेशी मरीजों के लिए समान गुणवत्ता

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारतीय और विदेशी मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता अलग नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर भारतीय मरीज को भी उसी स्तर की उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा मिले, जो विदेश से आने वाले मरीजों को दी जाती है।

60-80 फीसदी तक कम लागत में इलाज

गोयल ने भारत के मेडिकल वैल्यू टूरिज्म की क्षमता बताते हुए कहा कि देश के पास बेहतरीन clinical expertise, आधुनिक तकनीक और कई विकसित देशों की तुलना में 60 से 80 फीसदी तक कम स्वास्थ्य सेवा लागत है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ी मात्रा में compassion भी है। उन्होंने छोटे nursing homes और डॉक्टरों के क्लीनिक से लेकर बड़े नगर निगम, निजी और सरकारी अस्पतालों तक देशभर के चिकित्सा पेशेवरों द्वारा सीमित संसाधनों के बावजूद मरीजों की देखभाल के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

-(इनपुटः IANS)