प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। वित्त वर्ष 2021-22 में शुरू की गई इस 100% केंद्र वित्तपोषित योजना का उद्देश्य आजीविका के अवसर बढ़ाना, अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और शिक्षा तक पहुंच को मजबूत करना है। योजना के तहत 8 सितंबर 2026 तक 18,093 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया जा चुका है।
तीन योजनाओं के विलय से बनी पीएम-एजेएवाई
पीएम-एजेएवाई को तीन पूर्व केंद्र प्रायोजित योजनाओं- प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई), अनुसूचित जातियों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता उप योजना (एससीए टू एससीएसपी) और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (बीजेआरसीवाई) के विलय से बनाया गया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय इसे लागू कर रहा है।
गरीबी कम करने और रोजगार बढ़ाने पर जोर
योजना का एक प्रमुख उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों में गरीबी कम करना और अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसके लिए कौशल विकास, आय सृजन और आजीविका से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि लाभार्थियों को स्थायी आय के अवसरों से जोड़ा जा सके।
बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं का विस्तार
पीएम-एजेएवाई के तहत अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और आवश्यक सेवाओं की कमी को दूर करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण संकेतकों में सुधार करना और लोगों को बेहतर जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
शिक्षा और छात्रावास सुविधाओं पर फोकस
योजना के तीसरे प्रमुख उद्देश्य में साक्षरता बढ़ाना और अनुसूचित जाति के छात्रों को स्कूलों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। आकांक्षी जिलों, अनुसूचित जाति बहुल ब्लॉकों और देश के अन्य क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों तथा आवासीय सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है।
कौन ले सकता है योजना का लाभ
जीआईए घटक के तहत लाभार्थियों के चयन में उन परिवारों और व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनकी वार्षिक आय 2.50 लाख रुपए से अधिक नहीं है। अनुसूचित जाति बहुसंख्यक समूह के अनुसूचित जाति सदस्य भी पात्र हैं। अवसंरचना विकास के लिए ऐसे गांव पात्र हैं, जहां अनुसूचित जाति की आबादी 40% या उससे अधिक है और कुल आबादी कम से कम 500 है।
47,243 गांवों को आदर्श ग्राम बनाने का लक्ष्य
पीएम-एजेएवाई के आदर्श ग्राम घटक के तहत 47,243 अनुसूचित जाति बहुल गांव शामिल हैं। इनके माध्यम से देशभर में 47.79 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है। अब तक 46,944 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं और 27,032 ग्राम विकास योजनाएं तैयार की गई हैं। 8 सितंबर 2026 तक 18,093 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया जा चुका है। इन गांवों में बुनियादी ढांचे, मूलभूत सेवाओं और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी कमियों को दूर करने पर जोर दिया जा रहा है।
‘आदर्श ग्राम’ की परिकल्पना
आदर्श ग्राम में सभी वर्गों के लोगों के लिए आवश्यक मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता, असमानताओं में कमी और गरिमापूर्ण जीवन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां सभी निवासी अपनी क्षमता का पूरा उपयोग कर सकें।
राज्यों को 1,730 करोड़ रुपए से अधिक जारी
जिला और राज्य स्तर की सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए योजना के अनुदान सहायता घटक के तहत वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक राज्यों को सीधे 1,730 करोड़ रुपए से अधिक जारी किए गए हैं। इससे 2.5 लाख से अधिक व्यक्तिगत और समूह लाभार्थियों को कौशल विकास तथा आजीविका सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस घटक के तहत व्यापक आजीविका परियोजनाओं, कौशल विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे, अनुसूचित जाति बहुल गांवों में आवश्यक सुविधाओं और आवासीय विद्यालयों जैसी पहलों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
छात्रावास निर्माण से शिक्षा को बढ़ावा
अनुसूचित जाति छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने के लिए छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत भी योजना का हिस्सा है। सितंबर 2026 तक देश में 785 छात्र छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है। वित्त वर्ष 2026-27 में दो छात्रावास परियोजनाओं- एक लड़कियों और एक लड़कों के लिए- के निर्माण हेतु 61.46 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता आवंटित की गई है। इनसे 264 छात्रों को आवासीय सुविधा मिलने की उम्मीद है।
100% केंद्र वित्तपोषित योजना
पीएम-एजेएवाई पूरी तरह केंद्र द्वारा वित्तपोषित योजना है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त संसाधनों से योजना को पूरक कर सकते हैं। योजना के तहत 50% तक धनराशि चयनित आदर्श ग्रामों की कमियों को दूर करने वाले कार्यों के लिए रखी गई है। 5% तक राशि केंद्र स्तर पर तकनीकी सहायता समूह और परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों तथा राज्य और जिला स्तर की परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों के लिए निर्धारित है। छात्रावासों के निर्माण और मरम्मत के लिए 2% तक धनराशि केंद्रीय संस्थानों के लिए उपयोग की जाती है। शेष राशि जिला और राज्य स्तर की परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता के रूप में दी जाती है। इसका आवंटन अनुसूचित जाति की आबादी तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसूचित जाति उप-योजना के वार्षिक योजना अनुपात जैसे मानकों के आधार पर किया जाता है।
परियोजनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी राज्यों की
योजना के तहत अवसंरचना परियोजनाएं पूरी होने के बाद उनके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों या कार्यान्वयन एजेंसियों की होगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से निगरानी में बदलाव
पीएम-एजेएवाई मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए योजना के कार्यान्वयन को कागज आधारित प्रक्रिया से डिजिटल और वास्तविक समय आधारित प्रक्रिया में बदलने का प्रयास किया गया है। डिजिटल प्रणाली से सूचना तक पहुंच, निगरानी, जवाबदेही और डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ी योजना
पीएम-एजेएवाई का उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों के लिए सतत आजीविका, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर बुनियादी ढांचे तक पहुंच बढ़ाना है। योजना के तहत डिजिटल तकनीक, निगरानी तंत्र और अंतिम-मील वितरण को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक विकास को आगे बढ़ाया जा सके। (इनपुट: पीआईबी)


