पीएम मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी : सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की मित्रता को पद से परे विश्वास और आत्मीयता का रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि पद बदलते रहे, लेकिन दोनों नेताओं की दोस्ती और आपसी विश्वास कायम रहा। प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन शिंजो आबे की स्मृति को समर्पित आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन इस रिश्ते की विरासत को आगे बढ़ाने वाला ऐतिहासिक अवसर है।

काशी में आबे की स्मृति को स्थायी सम्मान

मुख्यमंत्री योगी ने बुधवार को रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शिंजो आबे को विनम्र श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को हमेशा के लिए संजो रही है।

गुजरात से शुरू हुई दोस्ती ने बदली रिश्तों की दिशा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान शिंजो आबे से उनकी पहली मुलाकात हुई थी। उसी वर्ष आबे ने भारतीय संसद में कहा था कि मजबूत भारत जापान के सर्वोत्तम हित में है और मजबूत जापान भारत के सर्वोत्तम हित में। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौते और वर्ष 2015 में शिंजो आबे की प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई दी। वर्ष 2017 में अहमदाबाद में दोनों नेताओं ने बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी, जबकि 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया।

‘यह प्रोटोकॉल नहीं था, एक रिश्ता था’

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो राष्ट्रों के विश्वास में बदल जाती है तो इतिहास की दिशा भी बदलती है। वर्ष 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे और भारत ने राष्ट्रीय शोक रखा। योगी ने कहा, “यह प्रोटोकॉल नहीं था, एक रिश्ता था।”

भारत-जापान संबंधों की बुनियाद है विश्वास

गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की दुनिया में बिना लाभ-हानि का हिसाब लगाए साथ खड़े रहने वाला मित्र मिलना कठिन है। दुनिया जहां अक्सर हितों के आधार पर रिश्ते बनाती है, वहीं भारत और जापान की साझेदारी ट्रस्ट यानी विश्वास पर आधारित है। उन्होंने बताया कि करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं और दोनों देशों का सहयोग अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। जापान के पास तकनीक और अनुभव है तो भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है।

उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बढ़ रहा निवेश सहयोग

मुख्यमंत्री योगी ने इसी वर्ष फरवरी में अपनी जापान यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपए के निवेश समझौते हुए। उन्होंने 500 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति वाली मैग्लेव ट्रेन में जापान की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि यामानाशी अब उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर है।

नोएडा में विकसित हो रही जापानी सिटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है। इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास स्केल, 25 करोड़ लोगों का विशाल बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे व एयरपोर्ट का बड़ा नेटवर्क है। यह साझेदारी दोनों पक्षों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

2027 के अमृत पर्व की पहली भेंट

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे। आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अमृत पर्व की पहली भेंट है। उन्होंने जापान को ‘लैंड ऑफ द राइजिंग सन’ और उत्तर प्रदेश को ‘लैंड ऑफ द सन डायनेस्टी’ बताते हुए दोनों सभ्यताओं के बीच ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंधों को रेखांकित किया।

बौद्ध तीर्थों से जुड़ा है भारत-जापान का भावनात्मक रिश्ता

उन्होंने कहा कि सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशाम्बी और संकिसा भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रमुख तीर्थ हैं। इसलिए जापान की आस्था और बौद्ध परंपरा का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी और क्योटो अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा हैं और दोनों शहरों ने विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास का रास्ता दिखाया है।

नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बनेगा कॉरिडोर

मुख्यमंत्री योगी ने आबे मेमोरियल कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम बताया। उन्होंने कहा कि यहां आने वाला हर युवा यह सीख सकेगा कि दूरदृष्टि रखने वाला एक नेता दो देशों के भविष्य को किस तरह नई दिशा दे सकता है। यह कॉरिडोर भारत-जापान मैत्री, विश्वास और साझा विरासत का स्थायी प्रतीक बनेगा।

शिंजो आबे को याद कर भावुक हुईं अकी आबे

जापान की पूर्व प्रथम महिला अकी आबे अपने पति शिंजो आबे को याद करते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनके पति का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गहरा लगाव और आत्मीय संबंध था। वर्ष 2015 में काशी आने के बाद शिंजो आबे उन्हें गंगा आरती और वाराणसी से जुड़ी यादें साझा करते थे। तभी से उनके मन में भी वाराणसी आने की इच्छा थी।

‘आज आबे जीवित होते तो बहुत खुश होते’

अकी आबे ने कहा कि यदि आज उनके पति जीवित होते तो अपने नाम पर बने इस स्मारक को देखकर बहुत खुश होते। यह कहते हुए उनकी आंखों में आंसू छलक आए। उन्होंने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर के डिजाइन की भी प्रशंसा की और बताया कि इसकी बाहरी दीवारों पर 108 रुद्राक्ष लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जापान में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है और नए कार्य की शुरुआत के अवसर पर बौद्ध मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाने की परंपरा है। (इनपुट: आईएएनएस)