प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आषाढ़ी बीज के पावन अवसर पर दुनिया भर में बसे कच्छी समुदाय को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर उन्होंने कच्छ की समृद्ध संस्कृति और समुदाय के मातृभूमि के प्रति गहरे लगाव को भी रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“कच्छ के लोगों का अपना अंदाज है। जैसे समुद्र में मछलियां होती हैं, वैसे ही जो कच्छ में रहते हैं, वे कच्छ के ही होकर रह जाते हैं। आज आषाढ़ी बीजका पर्व है, यह खास तौर पर कच्छ का ही त्योहार है। देश-दुनिया में बसे कच्छ के भाई-बहनों को ‘राम-राम’ और ‘जीजी-जीजी’ कहकर अभिवादन किया जाता है।”
पीएम मोदी ने एक पारंपरिक कच्छी कहावत भी साझा की, जो समुदाय की मातृभूमि के प्रति अटूट बंधन को दर्शाती है।
गुजरात सरकार ने भी दी बधाई
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कच्छ की धरती की प्रशंसा करते हुए कहा,
“कच्छ की समृद्ध धरती के मेहनती भाई-बहनों को नए साल की ढेरों शुभकामनाएं। यह नया साल आज के पवित्र त्योहार ‘आषाढ़ी बीज’ से शुरू हो रहा है, एक ऐसी जगह जहां रेगिस्तान भी कला का रूप ले लेता है और प्रकृति भी संस्कृति से ओत-प्रोत है।”
राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जीतू वघानी ने कहा कि आषाढ़ी बीज का अवसर कच्छ के लिए बेहद खास है। उन्होंने देश-दुनिया में बसे कच्छवासियों को खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
गुजरात के परिवहन राज्य मंत्री प्रवीण गोर्धनजी माली ने आषाढ़ी बीज को कच्छ की शानदार परंपरा, संस्कृति और विरासत का उत्सव बताते हुए सभी को शांति, समृद्धि और सफलता की शुभकामनाएं दीं।
भाजपा सांसद मयंक नायक ने भी नए साल में हर कच्छी परिवार के जीवन में खुशियां, शांति और समृद्धि आने की कामना की।त्योहार की खासियतआषाढ़ी बीज कच्छ क्षेत्र का प्रमुख नववर्ष त्योहार है, जो कृषि, संस्कृति और समुदाय की एकता का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन कच्छी समुदाय के लोग परंपरागत रूप से एक-दूसरे को “राम-राम” और “जीजी-जीजी” कहकर अभिवादन करते हैं। इस अवसर पर देशभर में कच्छी समुदाय के लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामूहिक प्रार्थनाओं और पारिवारिक समारोहों के माध्यम से नए साल का स्वागत कर रहे हैं। (इनपुट-एजेंसी)


